चुनाव में शासक दल को पड़ोसी देश से आंतरिक विवाद करता है मदद

नई दिल्ली। पड़ोसी देश के साथ युद्ध जैसे हालात या धर्म के नाम पर आंतरिक विवाद, लगभग हमेशा चुनावों में शासक दल की मदद करते हैं, फिर भले ही उसने आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने की दिशा में पर्याप्त प्रयास न किए हों। सीआरपीएफ के काफिले पर 14 फरवरी को हुए घृणित हमले, जिसमें इस अर्द्धसैनिक बल के 40 से अधिक सिपाही मारे गए और इसके बाद भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट पर हवाई हमले का भाजपा जमकर इस्तेमाल कर रही है। उसे उम्मीद है कि इससे चुनावों में उसे लाभ होगा। पुलवामा हमले की पूरी दुनिया में निंदा हुई है। पाकिस्तान के इस दावे में कोई दम नहीं है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल, आतंकियों को प्रशिक्षित करने और भारत पर हमले करने के लिए नहीं किया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर तैनात पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी भारत में आतंकवादियों को घुसपैठ करने में मदद करते हैं। जैश-ए-मोहम्मद व अन्य आतंकी संगठन, पाकिस्तान की सेना के मोहरे हैं और वहां के 'डीप स्टेट' का हिस्सा हैं। 


मरने वाले आतंकियों की संख्या के अपुष्ट दावे करने का एक उद्देश्य है, सरकार की अपने सुरक्षाकर्मियों की रक्षा करने में विफलता से देश का ध्यान हटाना। मीडिया का एक हिस्सा, सरकार को परेशान करने वाले सवाल उठा रहा था। जब इस आशय की गुप्तचर सूचनाएं थीं कि एक बड़ा आतंकी हमला हो सकता है, तब, क्या कारण था कि सीआरपीएफ के इतने बड़े काफिले को सड़क मार्ग से जम्मू से श्रीनगर जाने दिया गया। उन्हें हवाई मार्ग से क्यों नहीं ले जाया गया? जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने स्वीकार किया है कि सरकार, गुप्तचर रपटों पर समुचित कार्रवाई करने में असफल रही। जिस राज्य में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं वहां भारी मात्रा में विस्फोटक ले जा रहे वाहन को क्यों और कैसे रोका या पकड़ा नहीं गया? जम्मू-कश्मीर सरकार का यह दावा है कि उसने बड़ी संख्या में आतंकियों को खत्म कर दिया है। फिर, इतने आतंकी कहां से आ रहे हैं? कश्मीर के स्थानीय युवक, आतंकी संगठनों से क्यों जुड़ रहे हैं? क्या इसका कारण यह है कि कश्मीर समस्या को सुलझाने के लिए राजनैतिक स्तर पर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं? क्या पाकिस्तान के साथ बातचीत न करने की नीति के कारण कश्मीर में आतंकवाद और अतिवाद पर नियंत्रण करने के प्रयास असफल हो रहे हैं?


जाहिर है कि शासक दल इन मुद्दों पर चर्चा नहीं चाहता और इसके लिए यह जरूरी था कि देश का ध्यान किसी और दिशा में मोड़ दिया जाए। और इसलिए, हवाई हमले में बड़ी संख्या में आतंकियों के मारे जाने की चर्चा शुरू की गई। 'आधिकारिक' स्रोतों के हवाले से देश के लोगों को गुमराह किया गया, उन्हें यह बताया गया कि इस हमले में 300 से 650 के बीच आतंकी मारे गए। यह लोगों को लगे घावों पर मनोवैज्ञानिक मरहम लगाने का प्रयास था। परंतु क्या इससे भारत के लोग खून के प्यासे नहीं बन जाएंगे? क्या इससे देश की आंतरिक सुरक्षा बेहतर हो सकेगी? पठानकोट और उरी में हुए हमलों के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राईक ने भी इसी तरह लोगों के गुस्से को कम किया था और इन हमलों को भूल जाने में उनकी मदद की थी। परंतु क्या इससे पुलवामा रुक सका? हिंसा के इस दुष्चक्र में अपनी जानें गंवाने वाले भारतीय सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ती जा रही है और सुरक्षाबलों व अतिवादियों की लड़ाई में कश्मीर के आम नागरिक पिस रहे हैं। कश्मीर में आतंकवाद बेरोकटोक जारी है। इससे भी बड़ा खतरा यह है कि कश्मीर के अलगाववादी आंदोलन का वहाबीकरण हो रहा है और इससे कश्मीर का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह से ध्वस्त हो जाने की आशंका है।


हवाई हमलों में मारे जाने वाले आतंकियों की संख्या के बारे में अपुष्ट और बड़े-बड़े दावे कर भाजपा, वायुसेना द्वारा की गई कार्रवाई का श्रेय लेने का प्रयास कर रही है। शुरूआत में सरकार ने कहा कि उसने सेना को उपयुक्त समय और स्थान पर जवाबी कार्रवाई करने की खुली छूट दे दी है। वायुसेना ने अपने लड़ाकू पायलेटों की जिंदगी दांव पर लगाकर यह किया। परंतु वायुसेना की इस कार्रवाई का श्रेय भाजपा सरकार ले रही है। अगर हवाई हमले में मारे गए लोगों की संख्या के संबंध में दावे नहीं किए जाते तो भाजपा इसका श्रेय न ले पाती। भाजपा ने देश भर में विजय संकल्प बाईक रैलियां आयोजित कीं और ऐसा माहौल बनाया मानो इस हमले की योजना बनाने और उसे कार्यरूप में परिणित करने का काम भाजपा ने ही किया है। इस कार्रवाई का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री को दिया गया। नतीजा यह कि जो लोग सीआरपीएफ के 40 जवानों की अकाल मृत्यु के संबंध में कठिन सवाल पूछ रहे थे वे चुप हो गए। सोशल मीडिया पर मोदी भक्तों का राज है। कहने की आवश्यकता नहीं कि बदला-बदला चिल्लाने वाले राजनेता और खून का प्यासा देश, सैन्यबलों पर जल्दी से जल्दी कोई कार्रवाई करने का दबाव बनाता है और कई बार इस दबाव में की गई कार्रवाई  वांछित परिणाम नहीं देती।


पाकिस्तान ने आईएएफ पायलेट अभिनंदन वर्धमान को भारत को लौटा दिया। वर्धमान ने अपने मिग 21 बाईसन हवाई जहाज से पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को गिरा दिया। अभिनंदन को रिहा करने का कारण था पाकिस्तान में शांति के पैरोकारों का दबाव और पुलवामा के आतंकी हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद द्वारा लिए जाने के बाद, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना। परंतु भाजपा इसका भी श्रेय ले रही है। देश में जो कुछ भी अच्छा या सकारात्मक होता है, उसका पूरा श्रेय भाजपा अपनी गोदी में बैठे मीडिया की मदद से ले लेती है।