5 रुपये के नकली सिक्के फैक्ट्री का भंडाफोड़, नोएडा टकसाल के थैलियों का होता था इस्तेमाल
बहादुरगढ़। गणपति धाम इंडस्ट्री एरिया में फरीदाबाद क्राइम ब्रांच ने सोमवार को 5 रुपए के नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री पकड़ी। यहां से 5 लाख कीमत के नकली सिक्कों से भरे 10 कट्टे बरामद किए। सिक्के बनाने वाली मशीन जब्त कर फैक्ट्री सीज कर दी गई है। क्राइम ब्रांच ने गिरोह में शामिल एक महिला समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी सिक्कों को दिल्ली-एनसीआर समेत गुजरात और महाराष्ट्र तक होटलों और टोल प्लाजा पर सप्लाई करते थे।

 

सभी आरोपी यहां पर तीन माह से नकली सिक्के का कारोबार कर रहे थे। एक दिन में 4 लाख रुपए के सिक्के तैयार करते थे। तीन माह में तीन करोड़ से अधिक के सिक्के बाजार में सप्लाई कर चुके हैं। गिरोह सरगना ने थर्माकोल के कप-प्लेट बनाने की बात कहकर 4 माह पहले फैक्ट्री किराए पर ली थी। इस जगह का मालिक रेवाड़ी का रहने वाला है। 

थैलियों पर नोएडा टकसाल की फर्जी पर्ची लगाते थे 

लोहे की प्लेट से डाई के जरिए सिक्के तैयार करते। जैसे निशान असली सिक्के पर होते हैं, वैसे ही निशान इन पर बनाते थे। फिर पॉलिश कर असली जैसा रंग दिया जाता। एक सिक्के पर 25 पैसे लागत आती थी। इन्हें 100 की संख्या में थैलियों में भरते थे।

थैलियों पर इंडियन गवर्नमेंट मिंट (टकसाल) नोएडा की फर्जी पर्ची लगाकर सप्लाई के लिए भेजा जाता था, ताकि ओपन मार्केट में आसानी से चलाया जा सके। पुलिस ने कहा कि टोल प्लाजा के कुछ कर्मचारियों के भी धंधे में शामिल होने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

नाके पर जांच में सिक्कों के पैकेट मिले, तब खुलासा हुआ
दिल्ली के आनंदपुर कराला निवासी सुभाष उर्फ राहुल, मादीपुर निवासी दीपाली, यूपी के रामपुर के रेवड़ी खर्द निवासी नासिर अली और राजस्थान के जयपुर के जगदंबा नगर निवासी राकेश भाटी सिक्के सप्लाई करने फरीदाबाद जा रहे थे। खुफिया सूचना पर क्राइम ब्रांच की टीम ने सूरजकुंड स्थित एमवीएन पर नाकेबंदी कर इनकी इनोवा गाड़ी रुकवाकर जांच की तो 5 रुपए के सिक्कों से भरे 20 पैकेट मिले। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर बहादुरगढ़ की फैक्ट्री के बारे में पता चला। कोर्ट ने इन्हें 7 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है।

मार्केटिंग महिला करती थी
सुभाष सप्लाई एजेंट का काम देखता था। दीपाली मार्केटिंग करती थी। दीपाली विभिन्न राज्यों में स्थित टोल प्लाजा और होटल कर्मचारियों से संपर्क करती थी। इन जगहों पर सिक्कों की अधिक जरूरत रहती है और नकली सिक्के खपाना आसान भी होता था। सुभाष की मुलाकात चरखी दादरी के नरेश से हुई थी, जो नकली सिक्के बनाने के आरोप में गिरफ्तार हो चुका है। उसी से सुभाष ने यह धंधा सीखा। दीपाली दिल्ली में दिव्यांग बच्चों की देखभाल के लिए एनजीओ चलाती है। नासिर यूपी में पर्यावरण फाउंडेशन के नाम से एनजीओ चलाता है।