आज सिद्ध कट्ठा वाले बाबा पर चढ़ाई जाएगी चादर, उमड़ेगी भारी भीड़

नोएडा। नोएडा के सेक्टर 167-168 दोस्तपुर मंगरौली/ छपरौली गांव के निकट यमुना नदी के तटीय क्षेत्र स्थित पुस्ता के किनारे श्री सिद्ध बाबा कट्ठा वाले के समाधि पर आज शाम 6:00 बजे सार्वजनिक चादर चढ़ाया जाएगा।
इस मौके पर सैकड़ों भक्तों द्वारा बाबा के चादर को जयकारे के साथ उन्हें समर्पित भी किया जाएगा।


यहां आज बाबा का चादर स्पर्श करना बड़े ही सौभाग्य और पुण्य की बात मानी जाती है। जबकि अगले दिन गुरुवार को हवन, पूजन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन होगा। गुरुवार को सुबह 10:00 बजे से शानदार रागिनी कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है, जिसमें रागिनी के प्रमुख कलाकार ओमवीर चुड़ियाला सतपाल दोसा, हरेंद्र नागर हस्तिनापुर करतार नंगला, सुबोध चुड़ियाला, वर्षा चौधरी, उर्मिला किरणपाल गोविंदपुर तथा डांसर कोमल खतौली शामिल होंगे।


श्री सिद्ध बाबा कट्ठा वाले की लगातार ख्याति और प्रसिद्धि बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि यहां चादर चढ़ाने के लिए सुदूर क्षेत्र से भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना के लिए अर्ज निवेदन करते हैं।


सिद्ध कट्ठा वाले बाबा के संबंध में वैसे तो पूरी जानकारी अभी तक उपलब्ध नहीं है। पर, उनके भक्त बताते हैं कि वे गोरखनाथ परम्परा के एक बड़े और प्रसिद्ध महात्मा रहे हैं जिन्हें परम सिद्धि की प्राप्ति थी। उन्होंने जमुना की बीच धारा में छाडन पर अपनी साधना का केंद्र बनाया था। पर, बार-बार जमुना की बाढ़ से आसपास का कटाव होता था। लेकिन यह स्थान सुरक्षित रहा।
भक्तों द्वारा यहां तक कहा जाता है कि यमुना मैया ने उनकी साधना स्थल को अपनी धारा से काटने की बड़ी कोशिश की थी, लेकिन सफल नहीं हो सकी थी।
गोरखनाथ भक्त सिद्ध बाबा कट्ठा वाले के प्रभाव और चमत्कार से यमुना उनका कुछ बाल बांका भी न कर सकी थी और उनका स्थान सुरक्षित रहा। बताते हैं कि यहां बाबा का चमत्कार था कि खूंखार जंगली जानवर भी बाबा के दरबार मे शांत हो जाते थे।
कालांतर में जब बाबा समाधिस्थ हुए तो उनके भक्तों ने उनकी लम्बी समाधि बना दी। बाद में उनके भक्तों द्वारा बाबा बैठी हुई समाधि बना कर भव्य मंदिर का रूप दे दिया गया है। यहां पहले लोग उन्हें सैयद वाले बाबा के नाम से पुकारते थे, लेकिन अब सिद्ध कट्ठा वाले बाबा के नाम से पुकारते हैं। संभवतः यहां कट्ठा का पेड़ था जिसके पास यह समाधि थी, इसलिए लोग उन्हें कट्ठा वाले बाबा के नाम से पुकारने लगे।
बताते हैं कि यहां बहुत कालों से साल में बाबा की रात्रि में एक बार सवारी भी निकलती है। आवाज गूंजती है, जैसे कोई बारात जा रहा हो। पर, भनक लगने के बाद भी कोई कुछ नहीं बोलता। कई लोगों को उनका प्रसाद मिलने की बात भी कही जाती है। इसका अनुभव मुझे भी एक बार हो चुका है। यह सवारी बाबा के साधना स्थल से निकलकर पुस्ता मार्ग होते दोस्तपुर मंगरौली के पूर्वी मार्ग से आगे बढ़ जाती है। संभवतः उनके बड़े गुरु भक्त तक यह सवारी जाती है।


दोस्तपुर मंगरौली गांव के बड़े- बुजुर्ग बताते हैं कि जब उनकी भैंस, गाय आदि को कोई बीमारी लग जाती थी तो वह तुरंत बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते थे। तब बड़ा चमत्कारी लाभ मिलता था। लोग बड़ी श्रद्धा से खेतों से उत्पादित अन्न का पहला प्रसाद बाबा को चढ़ा कर समर्पित करते थे। आज भी बाबा के समाधि स्थल पर लोग चढ़ावे के रूप में गुड़ भेली, हलवा, पूरी, लावा, मेवा मिष्ठान आदि बाबा को समर्पित करते हैं। मनोकामना सिद्ध होने पर लोग चादर चढ़ाते हैं और धूप, अगरबत्ती दिखाते हैं।
यहां प्रति गुरुवार को भक्त बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। नोएडा- ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे सेक्टर 141 और 168 के गंदे नाले पर उतरकर पुस्ता मार्ग से तकरीबन डेढ़-दो किलोमीटर की दूरी पर निजी वाहन अथवा पैदल यहां आया जा सकता है।
वैसे, बाबा के कई भक्त हुए हैं जिन्होंने बड़ी जिम्मेवारी के साथ बाबा को जगाते रहे हैं।अब जय सिंह भगत जी इस काम को बखूबी निभा रहे हैं। उनके प्रयास से चादर चढ़ाने का रस्म पूरा होता है। साथ ही विशाल भंडारे, रागनी कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर दोस्तपुर मंगरौली और छपरौली गांव के निवासियों का बड़ा सहयोग रहता है। सभी मिलकर कार्यक्रम के आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।