बीजेपी के सामने आखिर क्यों घुटने टेक दी कांग्रेस !
 

नई दिल्ली।

2019 लोकसभा चुनाव के नतीजों के स्‍पष्‍ट संकेत मिल चुके हैं। भाजपा अपने दम पर 300 सीटें पाती लग रही है। पिछली बार (282) से भी ज्‍यादा। ऐसे रुझानों के संकेत साफ हैं कि कांग्रेस इस बार भी बीजेपी के मुकाबले कहीं नहीं टिकी। और, कांग्रेस की हालत देख कर यह लगता है कि अगले पांच साल में भी वह भाजपा को टक्‍कर देने की स्‍थिति में नहीं आएगी। यानी, अगर 2024 में भाजपा हारेगी भी तो अपने चलते, किसी और की वजह से नहीं। कांग्रेस की मुश्‍किल क्‍या है? सबसे बड़ी समस्‍या काडर की कमी है। पार्टी पुराने सदस्‍यों का उत्‍साह बनाने और नए सदस्‍य जोड़ने में कामयाब नहीं हो पा रही है। इसके लिए जिस कौशल और दूरदर्शिता की जरूरत है, उसका अभाव शीर्ष नेतृत्‍व में साफ दिखाई देता है।

बीजेपी ने अपनी सदस्‍य संख्‍या में अकल्‍पनीय विस्‍तार किया है। उसके पास पैसा है, सत्‍ता है। सत्‍ताधारी पार्टी अपने विस्‍तार में सरकारी मशीनरी का इस्‍तेमाल करती है, यह सच भी किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में किसी भी विपक्षी पार्टी के लिए विजन और धन की कमी के साथ सत्‍ता पलटना लगभग असंभव है, बशर्ते सरकार के प्रति लोगों में विरोधी लहर घर न कर गई हो।

 

कांग्रेस अगर चाहे कि 'मोदी हटाओ एजेंडा' पूर्ण करने के लिए संपूर्ण विपक्ष के साथ मिल कर कोशिश करे, तब भी उसके लिए आसान नहीं होगा। कोशिश इस बार भी हुई, पर कामयाब नहीं रही। इसके कामयाब नहीं होने के जो कारण (महत्‍वाकांक्षा, अहं आदि) रहे, वे कारण 2024 और उसके आगे भी बने रहेंगे। अगर, किसी तरह साथ आ भी गए तो जातीय समीकरण आड़े आएगा। 2019 के संकेत कह रहे हैं कि ध्रुवीकरण 'प्रो मोदी' और 'एंटी मोदी' के आधार पर हो रहा है। यह ध्रुवीकरण जातीय समीकरण को ध्‍वस्‍त नहीं भी करता तो बुरी तरह हिला तो रहा ही है।

आज भारत का राजनीतिक परिदृश्‍य विकल्‍प-शून्‍य बना हुआ है। वैसे ही, जैसे कांग्रेस के लिए 80 के दशक तक था। जिस तरह मजबूत विकल्‍प के अभाव में कांग्रेस ने सालोंसाल सत्‍ता का सुख भोगा, आज वैसी ही स्‍थिति बीजेपी के लिए है।