एक सांसद की संपत्ति टैक्सपेयर की वार्षिक आय से 354.8 गुना अधिक
नोएडा। भारत में टैक्सपेयर की सुविधाएं भले ही नदारद है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के रूप में सांसद सभी सुविधाओं से मालामाल हैं। एक संसद सदस्य (MP) और सामान्य टैक्सपेयर के बीच संपत्ति में अंतर को लेकर सामने आए सर्वे ने चौंका दिया है। सर्वे के मुताबिक एक सांसद की औसतन संपत्ति टैक्सपेयर की वार्षिक आय से 354.8 गुना ज्यादा है। यानी एक औसत टैक्यपेयर को लोकसभा सदस्य जितनी संपत्ति जुटाने में 345.8 साल का समय लगेगा। सांसद और टैक्सपेयर की संपत्ति में फासला पिछले पांच साला खूब बड़ा है। साल 2014 में यह फासला 299.8 गुना था। हालांकि बीते वर्षों का इनकम टैक्स आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है। मगर जो डेटा सामने आया है वो आयकर आंकड़ों में दी गई सकल आय पर आधारित है। सकल आय में वेतन, व्यावसायिक आय सहित सभी आय शामिल होती है।

ताजा विश्लेषण के लिए 2016-17 के वित्त वर्ष के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि सांसदों की संपत्ति के आकंड़े जुटाने के लिए लोकसभा चुनाव में दिए उनके हलफनामें का इस्तेमाल किया गया। गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा जुटाए आकंड़ों के मुताबिक 2014 से 2019 के बीच सांसदों की संपत्ति में 7.3 फीसदी की दर से बढ़ोतरी हुई। जबकि इनकम टैक्स दाखिल करने वाले व्यक्ति के लिए वित्त वर्ष 2014 और 2017 के बीच में सकल आय 4.9 लाख से 6 लाख रुपए हुई।

2014 से 2019 के बीच सांसदों की औसत संपत्ति में 14.7 करोड़ रुपए से 20.9 करोड़ रुपए तक बढ़ोतरी हुई। एक औसत व्यक्ति की तुलना में यह बढ़ोतरी कई गुना ज्यादा है। वित्त वर्ष 2014 में औसत वेतन आय 5.9 फीसदी (5.7 लाख रुपए) से बढ़कर वित्त वर्ष 2017 में 6.8 लाख रुपए हो गई।

जानना चाहिए कि 17वीं लोकसभा में 225 सांसद ऐसे हैं जो दोबारा चुनकर सदन में पहुंचे हैं। फिर से चुने गए सांसदों की तुलना से यह पता चलता है कि उनकी संपत्ति में वृद्धि व्यक्तियों की तुलना में कम (5.1 फीसदी की वार्षिक वृद्धि दर) है। जो सामान्य विकास दर से भी कम है। इसके अलावा एक करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति की घोषणा करने वाले सांसदों की संख्या इस बार खासी बढ़ी है। 2009 में ऐसे सांसदों की संख्या 58 फीसदी थी जो 2014 में 82 फीसदी हो गई और 2019 में यह आकड़ा 88 फीसदी तक पहुंच गया।