इस बार विश्व तम्बाकू दिवस पर धूम्रपान को ना कहें : डॉ. मयंक सक्सेना


नोएडा। धूम्रपान करने वाले न केवल खुद के बल्कि धूम्रपान नहीं करने वालों के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। भारत में तंबाकू का इस्तेमाल निवारक रोगों और मृत्यु का प्रमुख कारण है। उपरोक्त बातें आज नोएडा के सेक्टर 110 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के डॉक्टर मयंक सक्सेना के प्रेसवार्ता के दौरान कही।
उन्होंने बताया की तंबाकू का धूम्रपान भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया में अभी तक के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों का कारण बना हुआ है।
उन्होंने बताया की लगातार धूम्रपान करने वाले हर 4 व्यक्ति में से कम से कम एक व्यक्ति को सीओपीडी होने का खतरा बना रहता है। दमा और सीओपीडी दोनों में फेफड़ों की कार्य क्षमता में तेजी से गिरावट आता है।
उन्होंने बताया कि धूम्रपान नहीं करने वालों की अपेक्षा धूम्रपान करने वालों को सीओपीडी होने का 3 गुणा खतरा ज्यादा रहता है। धूम्रपान करने वाले 40% लोगों को स्थाई ब्रोंकाइटिस हो जाता है और उनमें से 20% लोग सीओपीडी के शिकार हो जाते हैं। जबकि आजीवन धूम्रपान करने वाले लोगों को अपने जीवन काल में सीओपीडी होने की 50% संभावना रहती है।
उन्होंने बताया कि तंबाकू का धूम्रपान करने वालों पर 7000 से अधिक रसायनों का असर होता है जिनमें करीब ढाई सौ रसायन प्रमाणिक पर पर हानिकारक और करीब 69 रसायन कैंसरकारी होते हैं। भारत में कैंसर के सभी मामलों में 30% से ज्यादा मुंह और फेफड़ों के कैंसर के मामले हैं जबकि तंबाकू के धुएं से 40 से अधिक रसायनों को कैंसरकारी पाया गया है। औसततन धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को फेफड़े, गला या मुंह के कैंसर से मरने का 14 गुना ज्यादा, ग्रास नली के कैंसर से चार गुना, हार्ड अटैक से दोगुना और मूत्राशय के कैंसर से 2 गुना ज्यादा मरने का खतरा रहता है।
डॉक्टर मयंक ने बताया कि पुरुषों की तुलना में सिगरेट पीने वाली स्त्रियों में फेफड़े की क्रियाशीलता में ज्यादा तेजी से गिरावट देखी गई है, किंतु पुरुषों की तुलना में सिगरेट छोड़ने वाली स्त्रियों के फेफड़ों की क्रियाशीलता में ज्यादा सुधार देखा गया है। उन्होंने कहा कि निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी को धूम्रपान करने वालों को धूम्रपान छोड़ने में मदद के लिए एक प्रभाव कारी उपचार के रूप में विश्व स्तर पर मान्यता मिली हुई है।
उन्होंने बताया कि तंबाकू का धूम्रपान एक बड़ी समस्या है और इसे हल करना तथा समय-समय पर इस विषय पर जागरूकता पैदा करना बेहद जरूरी है। अब समय आ गया है जब हमें नशे को छोड़कर ज्यादा मजबूत बनना है। तंबाकू को ना कहते हुए इसके चाहत को हर हाल में मिटाना होगा।
उन्होंने बताया कि स्मोकिंग एक बुरी लत है जो शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है। कैंसर जैसी बीमारी को पैदा करता है। वे इसके लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं। जो लोग नशाखोरी के शिकार हैं, उन्हें वे हर प्रकार से सहायता देने को तैयार हैं। खासकर वे युवा पीढ़ी को संदेश दे रहे हैं कि वे नशाखोरी को छोड़े और आने वाले जनरेशन की सोचें।