11 कवियों के काव्यसंग्रह काव्यांजलि का लोकार्पण सम्पन्न


पुस्तक लोकार्पण एवं काव्यगोष्ठी
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संस्कार भारती महानगर गाजियाबाद द्वारा दुर्गावती हेमराज टास सरस्वती विद्या मंदिर , नेहरू नगर, गाजियाबाद में कवयित्री आशा ज्योति की पुस्तक 'नवल गीत' और मां गंगा को समर्पित 91 कवियों का काव्यसंग्रह 'काव्यांजलि' का लोकार्पण हुआ ।
काव्य गोष्ठी का आयोजन प्रसिद्ध शायर मासूम गाजियाबादी की अध्यक्षता में एवं डॉ जयप्रकाश मिश्र के संचालन में संपन्न हुआ ।
मुख्य अतिथि के रुप में सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ राज कुमारी 'राज' और विशिष्ट अतिथि के रूप में हास्य कवि बाबाकानपुरी की उपस्थित में दीप प्रज्वलन के उपरांत धेय गीत पाठ के साथ कवयित्री इंदु शर्मा ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उनके गीत की ये पंक्तियां बहुत पसंद की गई-----
सावन की रिमझिम में झूलों से साख हिलें
फागुन में अलबेली राधा से श्याम मिले ।
एकता अखंडता हमारी परिपाटी है ,
महिमा से मंडित यह भारत की माटी है।।


कवि विनय विक्रम सिंह के दोहे भी खूब सराहे गये। उन्होंने कहा---
" सत्य दिखे दुविधा भरा, देता मन को त्रास।
इसका कारण है यही, भ्रामक है इतिहास।।"


कवि चंद्रभान मिश्र ने माटी पर अद्भुत कविता पाठ किया उन्होंने कहा---
जग के दुख हरने को माटी की थाती ,
माटी ही प्रभु को भी धरा में सजाती।
माटी से खेल खेल बढ़ते दुख-भंजन,
माटी का अभिनंदन अभिनंदन अभिनंदन।।


कवि डा.जयप्रकाश मिश्र ने कहा---
उनका साथ हो न हो मगर ऐहसास होता है ।
लगता है कि साँसों में उसीका वास होता है ।
मुसीबत के पर्वत भी वहीं पर सिर झुकाते हैं ।
जिनके शीश पर माँ बाप का आशीष होता है ॥


बाबा कानपुरी ने अपने संबोधन में कवयित्री आशा ज्योति के काव्य संग्रह 'नवल गीत' पर उन्हें बधाई दी और गंगा मां को समर्पित काव्यसंग्रह 'काव्यांजलि' की सराहना करते हुए मिट्टी से जिसका करीब का नाता है ऐसी चींटी पर अपनी रचना प्रस्तुत की---
नहीं किसी से डरती चींटी /ठान लिया जो करती चींटी/ ऊंची नीची पगडंडी पर /चलती कभी न गिरती चींटी।।


कार्यक्रम में कवयित्री आशा ज्योति, डॉ राज कुमारी शर्मा राज , डा हरिदत्त गौतम , डॉ मीनाक्षी कहकशां, जलज कुमार मिश्र, निवेदिता शर्मा, सीमा सिंह, डॉ स्वेता त्यागी, भूपेंद्र त्यागी, डॉ राजीव कुमार पांडे, कवयित्री सोनम यादव, डा बीणा मित्तल, सुरेन्द्र शर्मा सहित तीस कवियों ने काव्यपाठ किया।