लुधियाना में सड़े खाना खाने से 15 गायों की मौत
लुधियाना।  

 

मलेरकोटला में कथित तौर पर सड़ा हुआ खाना खाने के चलते 15 गायों की मौत का मामला सामने आया है। वहीं करीब 42 गायों की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह घटना मलेरकोटला में चौक 786 स्थित एक डेयरी फार्म की है, जिसके मालिक का नाम लियाकत अली बताया गया है। अली का कहना है कि 80 मवेशी (गायें और भैंसें) मारे गए हैं। लेकिन पशुपालन विभाग ने 15 गायों की ही मौत की पुष्टि की है।

पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर केजी गोयल ने कहा, 'अभी तक 15 गायों की मौत हो चुकी है, जबकि 42 की हालत गंभीर है। डेयरी फार्म के मालिक ने 50 मवेशियों को अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। 80 मवेशियों की मौत का उनका आंकड़ा स्वीकार नहीं किया जा सकता।'

गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी ने एक बयान जारी करते हुए कहा मवेशियों की मौत सड़ी-गली सब्जियां, रोटियां, ब्रेड आदि खाने से हुई है। बयान के मुताबिक मवेशियों को हरा चारा नहीं दिया जा रहा था। लियाकत अली के भतीजे मोहम्मद शमशाद ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'मेरे चाचा की तबीयत खराब थी, जिसके चलते फार्म का मैनेजमेंट में देख रहा था। हमारे पास छह कर्मचारी हैं और हम आलू, रोटियां, अनाज आदि खिला रहे थे। इनकी क्वालिटी खराब नहीं थी।'

 

उक्त डेयरी फॉर्म का मुआयना करने के बाद गुरु अंगद देव यूनिवर्सिटी के पशु रोग शोध केंद्र के प्रभारी डॉक्टर केएस संधू ने कहा, 'प्रभावित पशुओं में पैरालिसिस, उदर रोग, असामान्य श्वसन और असामान्य तापमान आदि के संकेत देखने को मिले। प्राथमिक जांच में पता चला है कि खराब भोजन के चलते पशुओं की हालत बिगड़ गई। सड़ा हुआ खाना जैसे आलू, सब्जियां, रोटियां आदि जानवरों को नहीं खिलानी चाहिए, इनकी जगह उन्हें हरा चारा खिलाना चाहिए।'

डेयरी फार्म में जानवरों को 26 मई की शाम को खाना खिलाया गया था और 27 मई को सुबह यह घटना हो गई। तीन साल पहले भी इसी डेयरी फॉर्म में पशुओं को बीमारी होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन तब एक मवेशी की मौत हुई थी। डॉक्टर गोयल ने कहा, 'डेयरी फार्म के मालिक ने 42 बीमार मवेशियों का इलाज करवाने से मना कर दिया है, ऐसे में हमने क्षेत्र के एनजीओ से मदद के लिए कहा है। उनकी हालत बेहद गंभीर है। हम उन्हें मरने नहीं देना चाहते, इलाज करना चाहते हैं।'

मोहम्मद शमशाद ने दावा किया, 'मैंने इन मवेशियों के इलाज के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च कर दिए हैं। अब मेरे पास इनके इलाज के पैसे नहीं हैं।' मुस्लिम-सिख फ्रंट ऑफ पंजाब के प्रेसिडेंट वसीम शेख ने इसे दुखद घटना करार देते हुए कहा कि मालिकों को मवेशियों के लिए खास ध्यान देने की जरूरत है।

शमशाद ने 50 मवेशियों को कहीं ओर भेजे जाने की बात से इनकार कर दिया। उसने कहा, '15 साल पहले हमारे परिवार ने करीब 40 लाख रुपए के निवेश के साथ चार मवेशियों को लेकर यह काम शुरू किया था। मैं क्यों मारे गए मवेशियों के संख्या को लेकर झूठ बोलूंगा? मैं सरकार से अपील करता हूं कि नुकसान को देखते हुए हमें मुआवजा दे ताकि हम फिर से काम शुरू कर सकें।'