महिला सशक्तिकरण के शिखर पर हैं माननीय जज साहिबा अनुदिता चौरसिया

हौसलों की उड़ान कामयाबी की मंजिल है। यह एक बहुत ही अच्छा और प्रेरणादाई वाक्य है। इसका अर्थ होता है कि जो लोग अपने हौसलों को शिखर पर रखते हैं और हमेशा सफलता पाने की कोशिश में जुटे रहते हैं उन्हें एक दिन सफलता जरूर हासिल होती है।


दोस्तों ! आपको कुछ ऐसे लोग मिल जाएंगे जो दूसरों के हौसलों को पस्त करने में जुटे रहते हैं। ऐसे लोग खुद नाकामयाब होते हैं और दूसरों को नाकामयाब बनाने की कोशिश में जुटे रहते हैं। ऐसे में सबसे पहले बात आती है लड़कियों की। लोग सोचते हैं कि लड़कियों के बस की बात नहीं है। वह तो चौका चूल्हे से अधिक कुछ नहीं कर सकती है। ऐसा कहकर वे लड़कियों से हौसला अफजाई नहीं कर पाते, बल्कि उसे कुंद करने की कोशिश करते हैं।


अगर लड़कों की भांति लड़कियों को भी हौसला अफजाई की जाए तो उनके भीतर कुछ करने, कुछ बनने की हौसला बढ़ सकती है। मैं आपके सामने चौरसिया समाज की एक ऐसी लड़की की सफलता गाथा को प्रस्तुत कर रहा हूं जो आज सफलता की उच्च शिखर पर हैं और आदर से माननीय जज साहिबा कही जाती हैं।


हम बात कर रहे हैं सागर मध्यप्रदेश  निवासी अनुदिता चौरसिया की। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट जबलपुर द्वारा आयोजित सिविल जज परीक्षा 2015 के घोषित परिणाम जब  निकला था तो वह प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने में कामयाब हुई थी। अनुदिता ने इस सफलता के लिए तीन साल की कड़ी मेहनत के उपरांत यह मुकाम पाया।


 मध्य प्रदेश सिविल जज की परीक्षा में उनका यह दूसरा मौका था। इसके अलावा वह राजस्थान सिविल जज की परीक्षा में वेटिंग पर रही थी। उन्होंने प्रिंस और साक्षात्कार के लिए पूरी तैयारी की थी। प्रिंस के लिए पूरे अच्छे से सामान्य ज्ञान तैयार किया था। पिछले प्रश्नों को बारीकी से देखा था और उन्हें हल किया था। जिस पैटर्न पर पेपर आते हैं उसी तरीके से तैयारी भी की थी। मेंस के लिए उत्तर को लिख लिख कर देखा  था। महत्वपूर्ण प्रश्न की सूची तैयार कर उन्हें हल किया था। जजमेंट  राइटिंग पर फोकस किया था। इंटरव्यू के लिए पूरी तैयारी की थी। रोजाना 8 से 10 घंटे तक समय देकर जज बनने की अपने सपने को फलीभूत किया।


अनुदिता अधिवक्ता बृज बिहारी चौरसिया की बेटी हैं। उनके भाई अमन चौरसिया जबलपुर हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं। निसंदेह अनुदिता चौरसिया समाज की बेटियों के लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणा स्रोत हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ तथा महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने में उनका सराहनीय पहल है। वह चौरसिया समाज के अभिभावकों को शिक्षा दे रही हैं कि वह बेटी को कमतर आंकने की भूल ना करें। अपने बेटियों को आगे बढ़ने के लिए उड़ान भरने दें। उन्हें मौका दें ताकि वह भी देश दुनिया में कुछ कर सकें।


जज की कुर्सी पर बैठकर अनुदिता चौरसिया सच्चाई के साथ फैसला कर रही हैं। वह निश्चिय ही कानून की दृष्टि में मर्यादित है।