सदरपुर में काव्य गोष्ठी का आयोजन



नोएडा। "काव्य सुधा" साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था की ओर से हास्य कवि बाबाकानपुरी के निवास स्थान ग्राम- सदरपुर, सेक्टर-45, नोएडा में आज एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि विनय विक्रमसिंह एवंं संस्था के संरक्षक बाबा कानपुरी ने मां गंगा को समर्पित गीत संग्रह 'काव्यांजलि' की प्रतियां कवि अटल मुरादाबादी एवं प्रेम सागर प्रेम को भेंट की। यह पुस्तक संस्कार भारती गाजियाबाद महानगर की ओर से प्रकाशित की गई है जिसमें 91 साहित्यकारों की मां गंगा को समर्पित रचनाएं संकलित हैं।


काव्य गोष्ठी का शुभारंभ अपने कविता पाठ से करते हुए कवि श्री प्रेम सागर प्रेम ने मां गंगा के अध्यात्मिक स्वरुप को प्रस्तुत किया------
जल में मन उसमें गरल, क्या क्या किया है आपने,
हो शुद्धता पर काम अब, भरे मन से मैं हूं पुकारती ।।


कवि अटल मुरादाबादी ने मां गंगा की महिमा पर कुछ दोहे प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा ---------
मां गंगा की आरती, गावे सब संसार। क्लेश मिठाए जगत से, बेड़ा कर दे पार।।
डुबकी एक लगाय के, कंचन काया होय।
गावे जो मन आरती, मन पावन हो सोए।।


मां गंगा की महिमा का गुणगान करते हुए बाबाकानपुरी ने कहा-----
धरती पर कायम है जो यह हरियाली,
इठलाती तरुओं की जो डाली डाली। खेतों में लहलहा रही हैं जो फसलें,
झूम रही गेहूं की ज्यों बाली बाली।
इस पर भी अधिकार जताती जो माता,
हर सुख-दुख में साथ निभाती ज्यों माता।।



इस अवसर पर पं. श्यामसुंदर मिश्र
उर्फ " चाचा सदरपुरी" ने गंगा पुत्र के रूप में मोदी जी को गंगा से जोड़ कर कविता सुनाई----
मोदी तो एक समंदर है इसमें हैं समाहित सब नदियां ,
गंगा का सेवक पुत्र है यह ,गंगा सागर कहलाएगा।।
अपने अध्यक्षीय काव्य पाठ में श्री विनय विक्रम सिंह ने आध्यात्मिक रचना प्रस्तुत की----
देह वस्त्र सम रे मना, बिरथा इसको काढ़ना।
चार पनों की मुक्तिका, रुच रुच इसको माड़ना।२।


इस अवसर पर कार्यक्रम में श्रीमती किसलय शर्मा,, समीर पांडेय, केशव मिश्र, पूर्णिमा शर्मा,
सुनील मिश्रा, रचना शर्मा आदि की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण थी।