आर्थिक गणना के तहत छोटे कामगारों की होगी गणना
नई दिल्ली। आर्थिक इकाइयों और कामगारों की गणना में इस बार रेहड़ी-पटरी वालों की आर्थिक स्थिति का आकलन भी किया जाएगा। असंगठित क्षेत्र में इस बड़े सर्वेक्षण के जरिये छोटा-मोटा काम करने वालों, मजदूरों और कामगारों को विशेष पहचान दी जाएगी, ताकि उन सभी को सरकारी योजनाओं के लाभ के दायरे में लाया जा सके।

इस आर्थिक गणना के तहत छोटे कारोबार और प्रतिष्ठान चलाने वाले, दर्जी, कुम्हार, लोहार जैसे रोजगार में लगे लोगों के साथ व्यावायिक इकाइयों/प्रतिष्ठानों के कामगारों की गिनती की जाती है। इससे प्रतिष्ठानों की आर्थिक गतिविधियों, मालिकाना हक, उनकी कमाई और खर्च जैसी अहम जानकारी मिलती है। इस बार आर्थिक गणना का काम जून के अंत में शुरू होगा और छह महीने में इसके पूरा होने की संभावना है। मानव संसाधन क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि रेहड़ी-पटरी वाले, हॉकर, सिलाई-कढ़ाई, दस्तकारी, चमड़े आदि के स्वउद्यम में लगे लोगों के आर्थिक स्थिति स्पष्ट होने से उन्हें पेंशन, बीमा और स्वास्थ्य क्षेत्र की योजनाओं के दायरे में लाया जा सकता है। इनका आंकड़ा जुटाकर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिया जा सकता है।  

 

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय सातवीं आर्थिक गणना को लेकर राज्य स्तर पर कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के साथ देशव्यापी अभियान छेड़ेगा। इसमें 12 लाख कर्मियों को लगाया जाएगा। एनएसएसओ और सूक्ष्म-लघु और मध्यम उद्योगों का मंत्रालय इसमें अहम भूमिका निभाएगा। इससे पहले छठवीं आर्थिक गणना 2013 में की गई थी जबकि पहली गणना 1977 में की गई थी। उसके बाद दूसरी 1980, तीसरी 1990, चौथी 1998 में और पांचवीं 2005 में की गई थी।