अवैध हथियारों की मंडी बन रहा देश की राजधानी/ एनसीआर
नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर अवैध हथियार की मंडी बनती जा रही है। यही कारण है कि बीते कुछ सालों में अवैध हथियारों की खपत दिल्ली में बढ़ गई है। राहगीरों से हथियार के बल पर लूटपाट का मामला हो या आपसी रंजिश में हत्या का मामला या फिर मामूली कहासुनी के बाद गोली मार कर हत्या का मामला। सभी ऐसे वारदातों में अक्सर अवैध हथियारों का ही इस्तेमाल किया जाता है।

गत 13-14 जून को दिल्ली में 24 घंटे के भीतर पांच लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी गई। इन सभी घटनाओं में कट्टा का इस्तेमाल किया गया था। इनमें से कुछ मामलों में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि कट्टा से लेकर गोली मार कर हत्या की गई थी। जानकारों की माने तो दिल्ली में मध्य प्रदेश, बिहार के मुंगेर, उत्तर प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों से हथियारों की आपूर्ति की जाती है। बदमाशों को .32 बोर की पिस्तौल और कट्टा कहीं अधिक पसंद है।

दिल्ली एवं एनसीआर में पहले लूट और हत्या मामले में ज्यादातर वारदातों में मुंगेर से लाए गए हथियारों का ही इस्तेमाल किया जाता था। अब मुंगेर की जगह मध्य प्रदेश के हथियार ने ले ली है। दरअसल, मध्य प्रदेश से आने वाले ये हथियार बिहार के मुंगेर बने हथियारों के मुकाबले अच्छे गुणवत्ता के होते हैं। इनके जाम होने की संभवना कम होती है। यही कारण है कि दिल्ली में हथियार तस्कर भी कहीं अधिक सक्रिय हो गए हैं, जिन पर नकेल कसना दिल्ली पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।


भलस्वा डेयरी में एक 17 साल के छात्र की हत्या के आरोप में नाबालिग को पकड़ा गया था। इसी तरह विकासपुरी में एक प्रॉपर्टी डीलर की गोली मार कर हत्या कर दी थी। गिरोह नाबालिगों से वारदात को अंजाम दिलवाते हैं। नई दिल्ली में भी सांसद के निवास पर कर्मचारी आवास में नाबालिग से हत्या करवाई गई। हालांकि, इन सभी मामलों में पुलिस ने आरोपी नाबालिगों को पकड़ लिया था। यही नहीं दिल्ली पुलिस आए दिन वाहन चोरी, झपटमारी, लूटपाट, सेंधमारी के मामलों में नाबालिगों को पकड़ती रहती है, जिससे गिरोह के सरगना वारदात को अंजाम देते रहते हैं।

 



दिल्ली पुलिस बदमाशों के आतंक को रोकने के लिए लाख दावे करती है, लेकिन बदमाशों का आतंक प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली पुलिस राजधानी में लगातार हो रहे बदमाशों के आतंक पर रोक लगाने में कामयाब नहीं हो पा रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष हत्याओं के मामलों में इजाफा देखने को मिला है। अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 31 मार्च तक 205 लोगों की हत्या की गई थी, लेकिन साल 2019 में यह बढ़कर 211 हो गई। बीते दिनों 24 घंटे के अंदर हुई पांच हत्याओं के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्विटर पर कानून व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे।