बेमिशाल धर्मनगरी हरिद्वार

 


बेमिशाल उत्तराखंड, बेमिशाल धर्मनगरी हरिद्वार
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उत्तराखंड राज्य को हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थानों में गिना जाता है। भगवान शिव के और अनेक पवित्र मंदिरों के कारण यह प्रसिद्ध है, यहा पर बद्रीनाथ और केदारनाथ, दो ऐसे तीर्थस्थल हैं, जो यहां सदियों पहले से हैं। बद्रीनाथ चार धामों में से एक है और सबसे पवित्र स्थलों में से है। केदारनाथ भी बद्रीनाथ जितना ही पवित्र और दर्शनीय स्थल है। यहां प्राचीन शिव मंदिर है, जहां 12 ज्योर्तिलिंग में से एक शिवलिंग विराजमान हैं। गंगोत्री धरती का वह स्थान है, जिसे माना जाता है कि गंगा ने सबसे पहले छुआ था देवी गंगा यहां एक नदी के रूप में आई थीं। यमुनोत्री यमुना नदी का स्रोत है और इसके पश्चिम में पवित्र मंदिर है। हरिद्वार गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह हिंदुओं का प्राचीन तीर्थस्थल है। ऋषिकेश सभी पवित्र स्थानों के लिए प्रवेश द्वार है।


धर्म की नगरी हरिद्वार
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हरिद्वार उत्तराखंड में स्थित भारत के सात सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह उत्तराखंड में समुद्र तल से 294.70 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। हरिद्वार को "धर्म की नगरी" माना जाता है। यह पवित्र नदी गंगा के दक्षिणी किनारे पर बसा है। यह हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय तीर्थस्थलों में से एक है। हरिद्वार, जिसका शाब्दिक अर्थ हरि का द्वार अर्थ है- 'हरि तक पहुँचने का द्वार'। हरिद्वार को मायापुरी, कपिला और गंगाद्वार के नाम से भी जाना जाता है। गंगा हिमालय के पहाड़ी इलाकों से पहली बार हरिद्वार के मैदानों में प्रवेश करती है। हिंदू तीर्थयात्री और श्रद्धालु धार्मिक उत्सवों में पूजा-अर्चना के लिए हरिद्वार में बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं। उत्तराखंड का हरिद्वार वह स्थान है, जहां हर 12 वर्ष में कुंभ और हर छह वर्ष में अर्धकुंभ लगता है। उत्तराखंड क्षेत्र के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों का प्रवेश द्वार हरिद्वार ही है। संपूर्ण हरिद्वार में सिद्धपीठ, शक्तिपीठ और अनेक नए पुराने मंदिर बने हुए हैं। यहाँ हर रोज़ एक त्यौहार होता है। माँ गंगा का त्यौहार!! सूर्योदय के स्नान से लेकर शाम की आरती तक हर एक क्षण एक त्यौहार है। हर रोज़ हज़ारो श्रद्धालु देश के कोने कोने से यहाँ गंगा दर्शन के लिए आते है और गंगा में स्नान कर के जनम जनम के पापों से मुक्त हो जाते है। देव भूमि हरिद्वार में कई अति मनोरम मंदिर व दर्शनीय स्थल है। यहाँ के बाजार बड़े लुभावने है। हर तरफ रोशिनी है, रौनक है। खाने के शौंकीन लोगों को हरिद्वार बिलकुल भी निराश नहीं करता, यहाँ स्वादिष्ट पकवानो की खूब सुन्दर दुकाने सुबह ही सज जाती है। पूजा की सामग्री व हिन्दू धार्मिक किताबो की भी बहुत सी दुकाने हैं। भारत के हर प्रांत के लोग यहाँ आते है और गंगा जी के पवित्र जल को बोलतों में भर कर अपने साथ ले जाते है। गंगा घाट व बाज़ारो में रंग बिरंगी बोतलों से सजी दुकाने देखीं जा सकती हैं। दूर दराज़ से आये यात्री गंगा के पावन जल में स्नान कर के अपनी सारी थकान भूल जाते है और हर हर गंगे के जाप करते हुए इस नगरी के मनमोहक दृश्यों को अपने मन में समेट लेते है। सायं काल की आरती का दृश्य बड़ा ही मनोरम होता होता है। श्रद्धालु आरती देखने के लिए गंगा घाट पर बनी सीढ़ियों पर बैठ जाते है। गंगा जल में दिखती आरती की अग्नि की ज्वालायें यूँ लगती है जैसे सेंकडों दीपक गंगा जल में डुबकियां लगा रहे हों। हालांकि, यह सिर्फ साधु-संतों की पसंदीदा जगह ही नहीं है, बल्कि यह तो कला, विज्ञान और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। यह धार्मिकता के साथ-साथ औद्यौगिक महत्व का शहर भी है। सिडकुल यहां का बड़ा औद्योगिक केंद्र है।