एमबीबीएस के लिए डीम्ड मेडिकल कॉलेज वसूल रहे एक करोड़ से अधिक फीस

नई दिल्ली। अदालत के आदेश पर डीम्ड मेडिकल कॉलेजों की फीस नियंत्रण की चल रही कार्रवाई के बीच सभी 39 डीम्ड मेडिकल कॉलेजों ने अपनी फीस जारी कर दी है। इस बार 17 मेडिकल कॉलेजों ने 20 लाख रुपये सालाना से अधिक फीस मांगी है। वहीं, आधा दर्जन से अधिक कॉलेज 18 से 20 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यानी इन संस्थानों से एमबीबीएस करने वाले छात्र-छात्राओं को पूरी पढ़ाई पर एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने पड़ेंगे।
डीम्ड मेडिकल कॉलेजों के आंकड़े बताते हैं कि इस बार पिछले साल के मुकाबले एमबीबीएस की फीस में इजाफा कम संस्थानों ने किया है। यहां तक कि पिछले साल सबसे अधिक फीस वसूलने वाले पुणे के डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज ने तो अपनी फीस में 4 लाख रुपये की कटौती की है। इसके बावजूद इन संस्थानों से एमबीबीएस करना मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र-छात्राओं के बस से बाहर है।
इस साल फीस में सबसे अधिक दो लाख रुपये की बढ़ोतरी गाजियाबाद के संतोष मेडिकल कॉलेज और चेन्नई के एसीएस मेडिकल कॉलेज में की गई है। इस बढ़ोतरी के साथ इन संस्थानों में एमबीबीएस की सालाना फीस क्रमश: 24 और 23 लाख रुपये हो गई है। डीम्ड मेडिकल कॉलेजों की मनमानी रोकने के लिए सितंबर 2017 में मद्रास हाईकोर्ट ने यूजीसी से डीम्ड संस्थानों में भी फीस नियंत्रण के लिए एक समिति बनाने का आदेश दिया था। इस समिति ने बीते 10 जून को मेडिकल कॉलेजों के बैंक खाते का ब्योरा मंगाया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भले ही ये संस्थान अभी छात्रों से ज्यादा फीस वसूल लें, लेकिन बाद में उन्हें समिति की ओर से तय फीस के अलावा ली गई राशि लौटानी पड़ेगी। अधिकारी ने कहा कि जुलाई महीने के पहले सप्ताह तक समिति अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप देगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि जुलाई में ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपना फैसला सुना देगा।

मद्रास हाईकोर्ट ने पिछले साल तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड मेडिकल कॉलेजों को एमबीबीएस की अधिकतम 13 लाख रुपये सालाना फीस लेने का आदेश दिया था। हालांकि, डीम्ड मेडिकल कॉलेजों ने इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले लिया था।