एटीएम से पैसे निकालने जा रहे हैं तो रखें अपनी जिम्मेदारियों का ख्याल, वर्ना हो सकते हैं फ्रॉड के शिकार

नई दिल्‍ली. देश में बैंकिंग सुविधाएं बढ़ने के साथ ऑनलाइन फ्रॉड भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में रिजर्व बैंक (RBI) ने इनके प्रति सचेत करने के लिए मीडिया में व्यापक स्तर पर बड़ा अभियान शुरू किया है। इसमें आरबीआई, बैंक, कस्टमर्स की जिम्मेदारियों के बारे में बताया जा रहा है। इस तरह के ऐड टीवी, प्रिंट हर जगह नजर आ रहे हैं। हालांकि आरबीआई ऑनलाइन फ्रॉड से होने वाले नुकसान से कस्टमर्स को बचाने के लिए  लगभग 2 साल पहले ही नियम ला चुका है।


भारतीय रिजर्व बैंक (RBO) ने बैंक अकाउंट (Bank Account) होल्‍डर्स या कस्‍टमर के हितों की रक्षा के लिए लगभग 2 साल पहले सर्कुलर जारी किया था। सर्कुलर में कहा गया है  कि अकाउंट से अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन या फ्रॉड होने पर कस्‍टमर को क्‍या करना चाहिए जिससे उसका नुकसान न हो और बैंक उसके पैसे की भरपाई कर दे। वास्तव में यह 3 से 7 दिन का नियम है, अगर आपको इस नियम के बारे में मालूम है तो आप फ्रॉड की स्थिति में बड़े नुकसान से बच सकते हैं।


आरबीआई की हाल में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 में अप्रत्याशित रूप से 71,500 करोड़ रुपए से संबंधित बैंक फ्रॉड के 6,800 केस सामने आए। वहीं एक साल पहले समान अवधि यानी 2017-18 में 41,167.03 करोड़ रुपए के फ्रॉड के 5,916 केस हुए थे। 
आरबीआई (RBI) ने कहा कि शिड्यूल्ड कमर्शियल बैंक और वित्तीय संस्थानों ने 71,542.93 करोड़ रुपए की धनराशि से जुड़े कुल 6,801 बैंक फ्रॉड के केस दर्ज किए थे।