ग़रीबी नहीं बन सका बाधक, आनन्द चौरसिया ने रुड़की जेईई में रहे सफल

रुड़की जेईई एडवांस में आनंद चौरसिया ने मारी बाजी,
ग़रीबी न बन सका रोड़ा
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कल्पनाओं का धरातल बेपनाह सुंदर है तो यथार्थ से परे और बेहद कठोर भी है। हकीकत के दायरे से बाहर सपनों की उड़ान भरोगे तो जीवन दूभर हो जाएगा। अतः हकीक़त के दायरे में उड़ान भरने की कोशिश हमेशा करें। यही सफलता का मार्ग है। इस हकीकत कहानी को साबित किया है चौरसिया समाज के होनहार छात्र आनन्द चौरसिया ने।


पिता गुम हो गए तो बड़े भाई ने सपना किया पूरा
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बिहार के पटना स्थित आनंद कुमार के सुपर-30 में पिछले दो साल से रह कर जेईई एडवांस की तैयारी करनेवाले आनंद चौरसिया ने रुड़की जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई किया है। उसे 6361 रैंक हासिल हुआ। ऐसे में उसका इंजीनियर बनना तय है, लेकिन उसे इतनी खुशी आठ सालों में पहली बार मिली है।


आठ साल पहले उसके पिता महेंद्र चौरसिया गुम गए हैं। तब से वे अबतक गुम हैं। ऐसे में बड़ा भाई एक दुकान पर रहता और मां व छोटा भाई मिलकर घर में ही एक छोटी- सी किराना दुकान चलाते हैं। इसी से उसकी दुनियादारी चलती है। लेकिन अगले पांच सालों के बाद आनंद चौरसिया के दिन फिरना तय है।
झारखंड निवासी आनंद चौरसिया सामान्य श्रेणी से यह उपलब्धि हासिल की है।
गर्व है चौरसिया समाज को ऐसे प्रतिभशाली छात्रों पर जो आगे बढ़ रहे हैं। अपनी सफलता की गाथा लिख रहे हैं और चौरसिया समाज के बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा जगा रहे हैं।