हनुमानजी और शनिदेव के बीच रहे हैं मजबूत रिश्ते


बजरंगबली और शनिदेव के बीच के रिश्ते के बहुत कम लोग ही जानते है। भगवान शनि आग से पैदा हुए थे जबकि हनुमान जी हवा से पैदा हुए इसलिए उनको पवनपुत्र कहते हैं। वैसे तो शनि देव क्रूर और निर्मम प्रकृति के माने जाते हैं जबकि भगवान शिव और हनुमान जी को अत्यंत दयालु माना गया है। भगवान शनि आग से पैदा हुए थे जबकि हनुमान जी हवा से पैदा हुए इसलिए उनको पवनपुत्र कहते हैं। एक ओर जहां शनिवार को तेल बेचना अशुभ माना जाता है, उसी दिन भगवान हनुमान जी को तेल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। हम आपको बताते हैं कि पवन पुत्र और सूर्य पुत्र के बीच संबंध क्या है-


कथा के अनुसार एक बार श्री हनुमान श्रीराम के दिए किसी कार्य में व्यस्त थे। उसी समय उस जगह से शनिदेव गुजर रहे थे जहां रास्ते में उन्हें हनुमान वह कार्य करते दिखाई पड़े। अपने स्वभाव के कारण शनिदेव को शरारत सूझी और वे उस रामकार्य में बाधा डालने बजरंबली के पास जा पहुंचे। क्या आप जानते हैं शनि देव के पिता सूर्यदेव भगवान हनुमान जी के शिक्षक है।


शनिदेव ने शरारत कर उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया पवन पुत्र ने शनिदेव को चेतावनी दी। बहुत समझाने के बाद भी ना मानने पर हनुमान ने शनिदेव जी को अपनी पूंछ में लपेट लिया और पुनः राम कार्य करने लगे में मग्न हो गए। वे कार्य में एकदम लीन हो गए इतने मुग्द हो गए कि उन्हें ध्यान ही नहीं रहा उन्होंने शनि को जकड़कर रखा हुआ है। इसी चक्कर में शनिदेवजी को बहुत सारी चोट लगीं और वे घयल हो गए। शनिदेव ने बहुत प्रयास किया लेकिन बजरंगबली की पकड़ से खुद को छुड़ा नहीं पाए। उन्होंने हनुमंत से बहुत विनती और आग्रह किया किंतु हनुमान कार्य में खोए रहे। जब उन्होंने राम कार्य समाप्त किया तब उन्हें ध्यान आया जिसके बाद उन्होंने शनिदेव को मुक्त किया। शनिदेव ने मुक्त होते ही हनुमान से क्षमा मांगी और कहा कि आज के बाद वे राम और हनुमान जी के कार्यो में कोई विध्न नहीं डालेंगे।

अपने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के बाद श्रीराम और हनुमान जी के भक्तों को उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। इसके बाद शनिदेव ने भगवान श्री हनुमान से थोड़ा सरसों का तेल माँगा जिसे वो अपने घावों पर लगा सकें जिससे उनकी लगी हुई चोटों को थोड़ा आराम मिले। हनुमानजी ने उन्हें तेल दिया और इस तरह शनिदेव के घाव ठीक हुए। तब शनिदेव ने कहा की मित्र हमारी तुम्हारी इस कथा को जो भक्त याद करके शनिवार के दिन मुझपर सरसों का तेल चढ़ाएगा उसे मेरा विशेष आशीष प्राप्त होगा। एक बार की बात है शनिदेव की अपने पिता के साथ लड़ाई थी, जिसका कारण था कि सूर्यदेव ने भगवान हनुमान को बहुत शक्तियां दी थी जिन्होंने हनुमान जी को महावीर बना दिया।