महज 8 साल की बच्ची 8 घंटे तक ग्लोबल वार्मिंग को लेकर खड़ी रही संसद भवन पर

नई दिल्ली। ग्लोबल वार्मिंग को लेकर दुनिया के तमाम देश चिंतित हैं। कुछ देश को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश देश ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पुराने ढर्रे पर खड़े हैं। लाख चेतावनियों के बाद भी इस ओर से लापरवाह बने हुए हैं।


यह सच है कि


क्‍लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज की तारीख हम सबके लिए बड़ी चुनौती है। यह दोनों ही समस्‍याएं एक दूसरे का पर्याय हैं। वायु प्रदूषण, जल संकट, और सूखे जैसी स्‍थ‍िति दिन-ब-दिन बढ़ रही है। लेकिन अफसोस की देश और दुनिया राजनीति, खेलकूद और सोशल मीडिया पर ट्रोलबाजी में ज्‍यादा दिलचस्‍पी दिखा रही है। इंसान तो इंसान जानवरों का जीना भी दूभर हो रहा है।


हम इस संकट को भले नजरअंदाज कर रहे हैं, लेकिन एक 8 साल की बच्‍ची ने ऐसा नहीं किया। वह हमारे लिए खड़ी रही।
संसद के बाहर तख्‍ती पर मेसेज के साथ हुई खड़ी
लाइसीप्रिया कांगजुम की उम्र महज 8 साल है। लेकिन वह हम सभी से ज्‍यादा समझदार है। वह जानती है कि बेहतर भविष्‍य चाहिए तो तपती धरती को बचाना होगा।


लाइसीप्रिया जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी बात पहुंचाना चाहती थी। पता है उसने इसके लिए क्‍या किया? हाथ में एक मेसेज प्‍लेकार्ड यानी तख्‍ती ली और संसद के बाहर खड़ी हो गई। सिर्फ इसलिए पीएम मोदी का ध्‍यान इस मुद्दे पर जा सके।


लाइसीप्रिया की तख्‍ती पर लिखा था, 'प्रिय श्रीमान मोदी और सांसद, जयवायु परिवर्तन कानून को पास करें और भविष्‍य को बचाएं।' यह छोटी सी बच्‍ची कहती है, 'मैं हमारे प्रधानमंत्री और सभी सांसदों ने अपील करती हूं कि वे जलवायु परिवर्तन के मामले में एक्‍शन लें और भविष्‍य को सुरक्ष‍ित करें। समुद्र का स्‍तर बढ़ रहा है और पृथ्‍वी गर्म होती जा रही है। उन्‍हें अब कार्रवाई करनी ही चाहिए।'


 बता दें कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर काम कर रही एक और ऐसी ही लड़की ग्रेटा थनबर्ग ने भी कुछ ऐसा ही किया था। बीते साल अगस्‍त, 2018 में वह स्‍वीडन के संसद के बाहर इसी तरह प्रोटेस्‍ट करने खड़ी हो गई थी।


आज सभी देशों के सरकारों को इस पर गंभीरता अपनाते हुए काम करने की जरूरत है। अन्यथा भावी पीढ़ी को छोड़िए, आज की पीढ़ी को बचाना मुश्किल होगा।