मोतीलाल चौरसिया का विश्व पटल पर एथलेटिक्स जीतने का सपना

70-72 सालों की बूढ़ी आंखों में भी है मोतीलाल चौरसिया को विश्व पटल पर एथेलेटिक्स चैम्पियन जीतने का ख़्वाब
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100,200 मीटर और 5 किलोमीटर की दौड़ में तीन स्वर्ण पदक जीत चुके हैं मोतीलाल चौरसिया
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जिंदगी की उड़ान अभी बाकी है
छुना आसमान अभी भी बाकी है
जिंदगी के कसमकस भरी दुनिया में
पंख फैला कर सारा जहां जाना बाकी है....
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राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में जज्बा दिखा चुके बांदा के बुजुर्ग धावक मोतीलाल चौरसिया पर यह दो पंक्तियां सटीक बैठता है।
ये वाक़ई में गढ़े हुए मोती ही हैं। उन्होंने बुढ़ौती में वह दम दिखाने की माद्दा रखते हैं, जो वाक़ई में क़ाबिल तारीफ़ है। उन्होंने यह साबित किया है कि सफलता किसी उम्र के लिए बाधक नहीं है। वे चौरसिया समाज के उन हजारों खिलाड़ियों के लिए प्रेरक हैं जो खेल के मैदान में अपनी प्रतिभा साबित कर और बुलंदियां कायम कर ट्रॉफी अपने नाम करना चाहते हैं।


सचमुच जोश और जज्बा कायम हो तो उम्र आड़े नहीं आती. इस कहावत को सच करने के लिए बेंगलुरू में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में जलवा दिखा चुके हैं उत्तर प्रदेश के बांदा शहर के 70 साल के बुजुर्ग धावक मोतीलाल चौरसिया।


बांदा शहर के मुहल्ला कालवनगंज के बुजुर्ग धावक मोतीलाल चौरसिया की एक सड़क दुर्घटना में एक पैर की हड्डी टूट गई थी, लेकिन हौसले के मजबूत मोतीलाल ने हिम्मत का परिचय देते हुए कानपुर में 27वीं प्रादेशिक मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100, 200 मीटर और पांच किलोमीटर की दौड़ में तीन स्वर्ण पदक जीतकर एक अद्भुत कृतिमान अपने नाम किया था।


मोतीलाल के आंखों का ऑपरेशन हो चुका है, बावजूद अभी भी उन्हीं बूढ़ी आंखों से राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीतने का सपना देखते वे थकते नहीं।
मोतीलाल चौरसिया बांदा के पंडित जे.एन. डिग्री कॉलेज में 1976 से 78 तक स्पोर्ट्स चैंपियन और बाद में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भी चैंपियन रह चुके हैं.

बुजुर्ग धावक चौरसिया ने कहते हैं कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले बुंदेलखंड में जोश और जज्बे की कमी नहीं है। उनकी अभी भी पूरी कोशिश रहती है कि वह राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत कर बुंदेलखंड और उत्तर प्रदेश की जनता को सौंपें।
वे चैंपियनशिप को जीत कर विश्व पटल पर भारत में बूढ़ी हड्डी का दम आज भी दिखाना चाहते हैं।


उनके ऐसे हौसलों को मैं तहेदिल से शुक्रियादा अर्पित करते हैं, इस उम्मीद से कि आप भी उनके जज़्बे को सलाम जरूर करेंगे। जय हिंद ! जय चौरसिया समाज।
* सुरेश चौरसिया, पत्रकार,
दैनिक राष्ट्रीय शान, नई दिल्ली
9810791027.