रेप या मर्डर से छोटा अपराध नहीं है प्रदूषण फैलाना: एनजीटी

 

नई दिल्ली। रेप या मर्डर सेकचरा (अपशिष्ट) प्रबंधन को लेकर कोई नियम नहीं होने पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने राज्यों को फटकार लगाई है। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने बड़ा बयान देते हुए कहा, 'प्रदूषण अब मर्डर या रेप से छोटा अपराध नहीं है। दुनिया प्रदूषण को बेहद गंभीरता से ले रही है, लेकिन हम नहीं। मुझे यह कहने में दुख हो रहा है कि देश के किसी भी राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर कोई नियम नहीं है। इसके पीछे फंड की कमी का भी कोई बहाना नहीं बनाया जा सकता।'

जस्टिस गोयल का यह बयान गुजरात सरकार की तरफ से विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सामने आया। उन्होंने यह भी कहा कि अहमदाबाद जैसे शहरों में बड़ी मात्रा में कूड़ा-कचरा निकलता है। जस्टिस गोयल ने जब यह बयान दिया तब गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और पर्यावरण संबंधी विभाग संभालने वाले उनकी कैबिनेट के दो साथी भी मौजूद थे।

एनजीटी प्रमुख ने कहा, 'भारत में हर साल प्रदूषण के चलते होने वाली अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियों से हर साल लगभग छह लाख लोगों की मौत होती है, इनमें 50 हजार अकेले गुजरात से हैं। एक बार पर्यावरण को नुकसान पहुंच गया तो फिर उसे ठीक नहीं किया जा सकता। हमें प्रदूषण और इसके खतरों को लेकर जागरूक रहना चाहिए। प्रदूषण फैलाने वाला भी उतना ही असुरक्षित है जितने दूसरे लोग हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिकरण के चलते सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ा है।'

उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद जनता से पूछा, 'हम पैसा कमा सकते हैं। लेकिन किस कीमत पर? क्या हम लाशों पर संपत्ति बनाने जा रहे हैं।' इस कार्यक्रम में 'दुनिया की पहली उत्सर्जन व्यापार योजना (इमिशन ट्रेडिंग स्कीम ऑन पार्टिकुलेट मैटर)' भी लॉन्च हुई। इसके तहत वायु प्रदूषण में कमी लाने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।