सेमेस्टर सिस्टम की तर्ज पर हो सकती है साल में बोर्ड की दो परीक्षाएं
 


नई दिल्ली। मानव संसाधन मंत्रालय के विशेषज्ञों की कमेटी ने सेमेस्टर सिस्टम की तर्ज पर बोर्ड परीक्षाएं भी साल में दो बार आयोजित करने की सिफारिश की है। इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने शुक्रवार शाम को नए मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ड्राफ्ट सौंप दिया।

ड्राफ्ट में कहा गया कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में बच्चों में तनाव कम करना चाहिए। छात्रों को बोर्ड परीक्षा में विषयों को दोहराने की अनुमति देने के लिए एक नीति बनाने को कहा गया है। इसके तहत छात्र को जिस सेमेस्टर में लगता है कि वह परीक्षा देने के लिए तैयार है, उस समय उसकी परीक्षा ली जानी चाहिए। बाद में अगर उसे लगता है कि वह और बेहतर कर सकता है तो उसे परीक्षा देने का एक और विकल्प देना चाहिए। साथ ही कंप्यूटर व तकनीक के जमाने में कंप्यूटर आधारित परीक्षा और पाठ्यक्रम कौशल विकास पर आधारित हो।
 
कमेटी ने अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं व संस्कृत या लिबरल आर्ट्स को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसके अलावा नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाई कराने और 1 से 18 वर्ष आयु तक के बच्चों को मुफ्त गुणवत्ता युक्त शिक्षा देने को कहा है। शिक्षा के अधिकार को पहली कक्षा की बजाय नर्सरी और आठवीं की बजाय 12वीं तक का विस्तार करने का सुझाव दिया गया है। मौजूदा स्कूल पाठ्यक्रम और पुस्तकों में गणित, खगोल विज्ञान, दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, योग, वास्तुकला, चिकित्सा के साथ साथ राजनीति, शासन, समाज और भारतीय ज्ञान प्रणाली में योगदान देने वाले भारतीयों के विषयों को शामिल किया जाना चाहिए। 

कमेटी ने राष्ट्रीय शिक्षा आयोग गठित करने का भी सुझाव दिया। इसके जरिये देश में शिक्षा के दृष्टिकोण को विकसित, कार्यान्वित, मूल्यांकन और संशोधित किया जा सके। पैनल ने जोर दिया कि शिक्षा और सिखाने के तरीके पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया जाना चाहिए।