स्नेहा चौरसिया को इंसाफ़ के लिए सभी चौरसिया एकजुटता दिखाएं

स्नेहा चौरसिया को इंसाफ़ के लिए प्रत्येक चौरसिया को आगे आना होगा


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सिवान में पुलिस कांस्टेबल के पद पर तैनात बिहार  के मुंगेर निवासी स्नेहा कुमारी चौरसिया सुसाईड केस को लेकर ख़ुद पुलिस द्वारा मामला रफ़ा - दफ़ा करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि यह अपराधी कोई पब्लिक नहीं, बल्कि उसी विभाग का शातिर अपराधी है, जिसकी तूती सरकार तक गूंजती है। इसके विरोध में दिल्ली के जंतर मंतर पर खड़े होकर आवाज उठाने की जरूरत है। इंडिया गेट से कंडिलमार्च निकला जाना चाहिए, ताकि स्नेहा को इंसाफ़ की गूंज पूरे देश तक पहुंच सके।
आज मीडिया, सोशल मीडिया पर ही इस केश से पर्दा उठाने और सीबीआई से जांच कराने की मांग की जा रही है। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त पर कुछ काम नहीं हो रहा है।
चौरसिया समाज के पुरोधा या सेवक आज सत्ता के गलियारों में पद लेकर चुप बैठ गए हैं। उनका असली चेहरा आज समाज के सामने है। जब जरूरत हो तो वे चौरसिया समाज के बीच झोली फैला लेते हैं। अब वे सत्ता सुख भोग रहे हैं, तो वे मुंह खोलने से रहे। इन पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता। ये भरोसे के काबिल भी नहीं।
चौरसिया समाज के उन हजारों व्यक्तियों को जरूर शुक्रगुजार मानना चाहिए जिन्होंने कम से कम मीडिया, सोशल मीडिया के माध्यम से आवाज उठाने की हिम्मत तो जुटाई है। उनके लिए इतना ही काफी है, क्योंकि वह उससे अधिक कुछ नहीं कर सकते। कम से कम चौरसिया समाज की लड़ाई में वे एक मुखर आवाज के साथ खड़े तो हैं। वे उन लोगों से अच्छे हैं जो समाज की आंखों में धूल झोंक कर सत्तासीन की चाशनी में डूबे हुए हैं।
भले ही स्नेहा चौरसिया को इंसाफ मिलेगा या न मिलेगा,यह वक़्त के दरम्यां पर है। पर, समाज के उन लोगों का असली चेहरा उजागर हो गया है जो समाज सेवक होने का बड़े-बड़े बड़े ढोंग और स्वांग रचाते हैं तथा सेमिनार में बड़े-बड़े फूल-माला पहनकर स्वागत समारोह आयोजित करवाते हैं और चौरसिया समाज के मसीही होने का दंभ, पाखंड भी ख़ूब भरते हैं।
जो चौरसिया समाज को सच्चे अर्थों में आगे ले जाना चाहते हैं, वे ही आज समाज की एक बेटी को इंसाफ़ दिलाने के लिए खड़े हैं। जो लोग आज खड़े हैं, वे ही समाज के असली गौरव हैं।
आप अपने विचार मर्यादित रखते हुए कमेंट जरूर करें।
* सुरेश चौरसिया, पत्रकार.