लघुकथा : जन्मदिन


पूरा मुहल्ला गुंजायमान है । पड़ोसी के बेटा का प्रथम जन्म दिन है ।
पत्नी का फरमान है.... कोई अच्छा सा बढिय़ा सा बर्थडे गिफ्ट ले आईये । मैं असमंजस में पड़ गया हूं कहां तो मैं सोच रहा था कि इस बालक के जन्मदिन पर हमलोग शामिल ही न होंगे और कहां यह मंहगे गिफ्ट लाने की बात कर रही है ।
बड़ी मुश्किल से मैं बोल पाया.....यह काम मुझसे नहीं होगा ।
पत्नी समझाती है.....छोड़ो भी । इस बालक का क्या दोष है ?
मैं.... इसी के जन्म के इंतजार में राजू ने पत्नी के पेट में पल रही तीन चार बेटियों की भ्रूणहत्या कराई है ।
पत्नी..... राजू की पत्नी भी तो नारी है , जब उसे ममता नहीं तब फिर आपको क्यों? उसी के कहने पर यह सब हुआ है । आप चिंतन करते रहिए मैं गिफ्ट खरीदने जाती हूं ।



               * बालमुकुंद मोदी, देवघर ( झारखंड )