नोएडा। जब से नोएडा के निर्माता नोएडा प्राधिकरण की कुर्सी पर दबंग आईएएस अधिकारी रितु माहेश्वरी बैठी हैं, तब से नोएडा प्राधिकरण में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों को सीईओ के पद और उस पद की ताकत का एहसास होने लगा है। 12 बजे झोला लटकाये प्राधिकरण आने वाले अफसर, बाबू एक- एक घंटे पहले ही ऑफिस पहुंच रहे हैं। कार्यालय में खौफ़ इतना कि जैसे सीईओ की छाया पीछे पड़ गया हो। मैडम किसको, कब बुलाकर फाईलों की जांच व कार्य की ब्यौरा न मांग लें, यह दहशत है। रिश्वत लेने वाले अधिकारी अब रिश्वत लेने और मांगने से तौबा कर रहे हैं। कुछ घूसखोर अभी भी रिश्वत ले रहे हैं, वह भी चोरी- छिपे। इसके पूर्व तो वे छाती ठोककर रिश्वत वसूलते थे, यह कहकर की जाओ, सीईओ को हमारे खिलाफ शिकायत कर दो। आज वे ही लोग हैं जो सीईओ के नाम से ही कांप उठते हैं। अबतक कई मामलों की जांच की जा रही है और मैडम खुद उनपर नजर रख रही है। उधर , मैडम को नोएडा से बाहर करने की सारी जुगत पर पानी फिर रहा है। शहर के दबंग जनप्रतिनिधि भी उनकी कुछ मदद नहीं कर पा रहे। साथ ही मैडम ईमानदारी से प्राधिकरण की जंग और धूल को साफ करने में जुटी हुई हैं। अगर रितु माहेश्वरी यहां साल भर भी टिक गईं तो नोएडा स्मार्ट सिटी के लायक बनाकर ही छोड़ेंगी।
नोएडा प्राधिकरण में छोटी-बड़ी विकास की कई परियोजनाएं कागजी तौर पर चल रही हैं, जिसे ठीक किया जा रहा है।परियोजनाएं धरातल पर अब तक नहीं आ सकीं। इसकी वजह सलाहकर कंपनी व प्राधिकरण अधिकारियों द्वारा बनाए गए बजट पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी की ओर से आपत्ति लगाया जाना है। प्राधिकरण की 70 प्रतिशत फाइलों में आपत्ति लगाई गई हैं। जिनका निस्तारण व संसोधित बजट प्रस्तुत करने की प्रक्रिया चल रही है। बजट संसोधित करने की यह प्रक्रिया बोर्ड बैठक से पहली की जानी है। बोर्ड बैठक 22 सितंबर को प्रस्तावित है। पहले यह बैठक 20 फरवरी उसके बाद 12 सितंबर को होनी थी।
प्राधिकरण के इलेक्ट्रिक और अनुरक्षण, वर्क सर्किल, उद्यान, जन स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने आपत्तियां लगाई हैं। यह आपत्तियां परियोजना के प्रारूप को लेकर नहीं बल्कि बजट को लेकर है। जिसमें सेक्टर-142 एडवांट के पास विद्युत लाइनों के स्थानांतरण को लेकर हो या पार्कों के विकास को लेकर। हाल ही में मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने सेक्टर-117 में निर्माणाधीन पार्क का कार्य इसलिए रूकवा दिया कि क्योंकि पार्क की लागत ज्यादा थी, साथ ही जमीन का पूर्ण अधिग्रहण भी नहीं किया गया था। इसकी जांच महाप्रबंधक कर रहे हैं। जल्द ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी। हालांकि अधिकारियों की ओर से बजट में किसी तरह की गड़बड़ी न होने साथ ही कार्यों में किस मद से पैसे खर्च किए जाते हैं, इसका पूर्ण ब्यौरा भी दिया जा चुका है। बावजूद इसके कई फाइलों पर आपत्ति अब भी है, जिनका निस्तारण किया जा रहा है।
फोन पर नहीं दिया जा रहा अपडेट,
मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने विकासीय व प्रतिदिन के किए गए कार्यों की रिपोर्ट वर्क सर्किल अधिकारियों को फोन पर एसएमएस के जरिए देने के लिए कहा था। इन नियमों का पालन कुछ ही अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है। बताया गया यह निर्देश दिए हुए एक सप्ताह हो चुका है। फीड बैठक नहीं मिलने से सीईओ में अंसतोष है। बहरहाल विकासीय कार्यों के बजट को लेकर अधिकारियों व मुख्य कार्यपालक अधिकारी के बीच उथल-पुथल है।
अब तक शुरू नहीं हो सकी परियोजनाएं ,
' एक्सप्रेस-वे के नीचे बनाए जाने वाले चार अंडरपास
' डीएससी रोड पर भंगेल से सेक्टर-81 तक बनाई जानी वाली एलिवेटेड
' सेक्टर-71 चौराहे पर बनाया जाने वाला अंडरपास
' विद्युत यांत्रिकी से संबंधित तारों के स्थानांतरण का कार्य
' पंचशील में बनाया जाने वाला ऑडिटोरियम/ मैस
' तीन से चार स्थानों पर बनाए जाने वाले एफओबी ।