31 अक्टूबर को नहाय- खाय के दिन होगी दिव्य सूर्य आरती सह-गंगा आरती

देव में छठ पर्व के नहाय- खाय के प्रथम दिन लाखों दीयों से जगमगा उठेगा सूर्यकुंड तालाब, होगी दिव्य सूर्य आरती सह-गंगा आरती
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देव का सबसे बड़ा दीपावली छठ महापर्व के पावन अवसर पर 31 अक्टूबर को नहाय- खाय के दिन प्राचीन सूर्यकुंड तालाब पर दिव्य सूर्य आरती सह-गंगा आरती के साथ प्रारम्भ होगा।  इस मौके पर सूर्यकुंड तालाब एक साथ लाखों दीयों से जगमगा उठेगा। उस दिन सूर्यकुंड तालाब का विहंगम दृश्य बड़ा रमणीय हो जाता है।


भगवान सूर्य जो कश्यप ऋषि के पुत्र हैं और अदिति उनकी माता हैं। जो समस्त संसार को नित्य प्रकाश प्रदान करने वाले है, जिनकी प्रशंसा में वेद पुराण भरे पड़े हैं। ऐसे में देव में  सूर्य आरती सह-गंगा आरती में शामिल होकर हमें उनका आशीष लेना चाहिए। 


देव भगवान सूर्य की जन्मभूमि है। देव से ही सर्वप्रथम छठ पूजा की शुरुआत हुई है। प्राचीन सूर्य कुंड तालाब से ही सूर्य के तीनों स्वरूप ब्रह्मा, विष्णु और महेश की दिव्य मूर्तियां पुरुरवा वंशी राजा येल द्वारा कुष्ठ रोग दूर होने के पश्चात निकाली गई थी, जिसे सूर्यमंदिर में स्थापित किया गया था। यहां भगवान राम, पांचों पांडवों सहित द्रौपदी, कृष्ण पुत्र साम्ब, च्यवन ऋषि, शुक्राचार्य पुत्री देव्यानी, मयूर भट्ट, बाणभट्ट सहित अनेक महापुरुषों के आने का प्रमाण मिलता है।


दिव्य सूर्य आरती सह गंगा आरती ,
स्थान - देव सूर्य कुंड तालाब परिसर
समय- 5 बजे , 31 अक्टुबर (नहाय खाय)
निमंत्रण -स्वयं पहुंचे और एक दीपक साथ लायें।