अति प्राचीन है छठ महापर्व

प्राचीनता का प्रतीक है छठ महापर्व,  
प्रियवद, भगवान श्रीराम, पांडव, कर्ण भी थे छठ उपासक
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सतयुग में राजा प्रियवद, त्रेता में भगवान श्रीराम, द्वापर में दानवीर कर्ण और पांच पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी। इस प्रकार छठ पूजा प्राचीन काल से होता आ रहा है। पवित्रता और शुद्धता का बेमिशाल यह पर्व भगवान सूर्य और उनकी बहन छठी माता को समर्पित है।
छठी मैया की पूजा से जुड़ी एक क​था राजा प्रियवद की है, जिन्होंने सबसे पहले छठी मैया की पूजा की थी। आइए जानते हैं कि सूर्य उपासना और छठ पूजा का इतिहास और कथाएं क्या हैं।


राजा प्रियवद ने पुत्र के प्राण रक्षा के लिए की थी छठ पूजा
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एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियवद नि:संतान थे, उनको इसकी पीड़ा थी। उन्होंने महर्षि कश्यप से इसके बारे में बात की। तब महर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। उस दौरान यज्ञ में आहुति के लिए बनाई गई खीर राजा प्रियवद की पत्नी मालिनी को खाने के लिए दी गई। यज्ञ के खीर के सेवन से रानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मृत पैदा हुआ था। राजा प्रियवद मृत पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और पुत्र वियोग में अपना प्राण त्याग लगे।


उसी वक्त ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने राजा प्रियवद से कहा, मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं, इसलिए मेरा नाम षष्ठी भी है। तुम मेरी पूजा करो और लोगों में इसका प्रचार-प्रसार करो। माता षष्ठी के कहे अनुसार, राजा प्रियवद ने पुत्र की कामना से माता का व्रत विधि विधान से किया, उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी थी। इसके फलस्वरुप राजा प्रियवद को पुत्र प्राप्त हुआ।


श्रीराम और सीता ने की थी सूर्य उपासना
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पौराणिक कथा के अनुसार, लंका के राजा रावण का वध कर अयोध्या आने के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता ने रामराज्य की स्थापना के लिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को उपवास रखा था और सूर्य देव की पूजा अर्चना की थी।


द्रौपदी ने पांडवों के लिए रखा था छठ व्रत
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द्रौपदी ने पांडवों के लिए रखा था छठ व्रत
पौराणिक कथाओं में छठ व्रत के प्रारंभ को द्रौपदी से भी जोड़कर देखा जाता है। द्रौपदी ने पांच पांडवों के बेहतर स्वास्थ्य और सुखी जीवन लिए छठ व्रत रखा था और सूर्य की उपासना की थी, जिसके परिणामस्वरुप पांडवों को उनको खोया राजपाट वापस मिल गया था।


दानवीर कर्ण ने शुरू की सूर्य पूजा
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महाभारत के अनुसार, दानवीर कर्ण सूर्य का पुत्र था और प्रतिदिन सूर्य की उपासना करता था। कथानुसार, उसने सबसे पहले सूर्य की उपासना शुरू की थी। वह प्रतिदिन स्नान के बाद नदी में जाकर सूर्य को अर्घ्य देता था।
आज भारत के छठ पर्व काफी प्रचलित हो गया है।