बाह्य ज्योति से आंतरिक ज्योति का मेल योग है : विष्णुदत्त

**  बाह्य ज्योति से आंतरिक ज्योति का मेल ही योग है"---विष्णुदत्त 'सरस'


ग़ाज़ियाबाद। अखिल भारतीय योग संस्थान,रजि.गाजियाबाद द्वारा सदरपुर रोड,गोविन्दपुरम स्थित सिटी पार्क में आयोजित  दीपावली मंगल मिलन समारोह धूम-धाम से सम्पन्न हुआ।



योग शिक्षिका श्रीमती सीमा शर्मा जी व झुग्गी झोपड़ी के बच्चों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया व ओ३म् की ध्वनि,गायत्री मंत्र से सत्र को प्रारंभ किया गया।


संस्थान के अध्यक्ष श्री के के अरोड़ा जी ने सुक्ष्म व्यायाम व ताड़ासन,तीर्थक ताड़ासन,कटि चक्रासन,तीर्थक भुजंगासन एवं उदराकर्षण आसान का अभ्यास कराया व इसके लाभों की चर्चा की।
संगठन मंत्री श्री मनमोहन वोहरा जी ने वीरेचन क्रिया,आर्ट ऑफ लिविंग भस्रिका,कपाल शोधन, अनुलोम विलोम का अभ्यास कराया व इनके लाभों की चर्चा की।
राज नगर एक्सटेंशन से योग शिक्षिका श्रीमती सीमा गोयल के साथ आई कुमारी दिया ओर दिशा का सरस्वती वंदना पर नृत्य का प्रस्तुतिकरण आकर्षण का केंद्र रहा।
श्रीमती मीता खन्ना व साथियो ने दीपावली पर सुमधुर गीत "आज दीवाली मनाएंगे-2,अज्ञानान्धकार मिटायेंगे,ज्ञानप्रकाश फेलायेंगे" सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।


समारोह के मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र शिशोदिया जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज आप लोगों के बीच आकर प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ,योग,ध्यान हमारी प्राचीन विद्द्या है जिसको की दुनिया तक हमने पहुँचाया है,योग का अर्थ जोड़ना है अर्थात परमात्मा व आत्मा का मिलन योग है,आज की भागदौड़ की जिंदगी में हम चिन्ताग्रस्त रहते हैं,यदि नित्यप्रति हम योगाभ्यास करें और ज्ञान की बाते भजन आदि सुने तो चिंतामुक्त रहेंगे और रोगों से बचे रहेंगे।ध्यान आनन्द का विषय है,प्रभु की कृपा बरस रही है।उन्होंने आगे कहा कि हमे युवा पीढ़ी को भी योग के माध्यम से स्वस्थ्य रखना है,अच्छे राष्ट्र का निर्माण करना है, सुन्दर कार्यक्रम के लिये संस्थान के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।


समारोह के मुख्य वक्ता विश्वविख्यात कथा वाचक श्री विष्णुदत्त "सरस" का श्री देवेन्द्र हितकारी व के के अरोड़ा जी द्वारा उनका सम्मान किया गया,
श्री विष्णुदत्त जी ने अपने सम्बोधन में शिविरार्थिओं को पंच दिवसीय इस त्यौहार की बधाई दी,मिट्टी के के दीपक का महत्व व भारतीय संस्कृति सनातन है,यहाँ कोई भी शुभ कार्य प्रभु अराधना के बिना नहीं होता,हमारा शरीर पंच तत्वों पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु व आकाश से बना है जिनसे बना है उन्हीं के सहयोग से कार्य करता है और क्रमशः गंध-नासिका, रस-जिवह्या,रूप-आंख,स्पर्श-त्वचा,शब्द-कान का गुण है अतः इन पांचों तत्वों के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिये।उन्होंने आगे कहा कि प्रकाश पर्व पर आपके बीच आकर प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ उन्होनें "असतो मां सदगमय, तमसो मां ज्योतिर्गमय" बोलकर बताया कि आज का मानव सांसारिक वस्तुओं में इतना खो गया है कि उस एक को भूल गया है जो योगियों की आत्मा में रमण करता है,वह प्रभु है,ध्यान साधना में क्यों मोन रहते हैं उस एक से मिलने के लिये,योग के माध्यम से हमे उस एक प्रभु की तलाश करनी है जो परम ज्योति है वही हमे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलेगी आज का पर्व आत्म निरीक्षण का पर्व है अतः हमें देखना होगा कि हम अच्छाइयों से बुराइयों की ओर तो नहीं जा रहे?  बाह्य ज्योति से आंतरिक ज्योति का मेल ही योग है।


संस्थान के अध्यक्ष श्री के के अरोड़ा ने  कहा "आंधी हो तूफान हो चेहरे पर मुस्कान हो" ओर आगामी षट्कर्म कार्यक्रम की जानकारी दी,आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।


केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य व श्री डी एन शर्मा द्वारा विशिष्ट अतिथि श्री जगदीश मरवाह जी जोकि टेलेंट हिंट चलाते हैं,का शाल ओढ़ा कर स्वागत किया गया।


इस अवसर पर मुख्य रूप से सर्वश्री हरितृषि विजय कुमार बघेल,पार्षद सोमवीर जी,डॉ मधु पोद्दार,ओमवीर चौधरी,मुकेश चौधरी,ट्रैफिक पुलिस नोएडा,आर के मदान,अशोक शास्त्री,लक्ष्मण गुप्ता,डी एन शर्मा,सुभाष गर्ग, चरत कुमार,सन्त राम आदि उपस्थित रहे।


 श्रीमती वीना वोहरा जी ने सुन्दर डेमोस्ट्रेशन के साथ साथ अंत में दर्शना मेहता जी व अन्य शिक्षिकाओं ने शांतिपाठ व प्रार्थना कराई। इसके पश्चात प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन  हुआ।मंच का कुशल संचालन संस्थान के महामंत्री श्री देवेन्द्र हितकारी जी ने किया।