देव में छठ महापर्व के साथ बच्चों का मुंडन कराने का है विशेष महत्व

देव में छठ महापर्व के साथ मुंडन का भी है विशेष महत्व
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देव में दीपावली के दूसरे दिन से ही छठ व्रत करने के लिए बड़ी संख्या में भक्तों का आना शुरू हो जाता है। देव में छठ पर्व करना विशेष फलदाई माना गया है।  कहते हैं कि छठी मईया की कृपा से जब व्यक्ति को पुत्र- रत्न की प्राप्ति होती है तो लोग यहां छठ जरूर करते हैं। आस्था भी है और उस बच्चे को यहां सूर्यमंदिर के पीछे अथवा सूर्यकुंड तालाब पर मुंडन भी किया जाता है।



देव पहुंचने वाले छठ व्रतियों में मुंडन और मनौती से जुड़े लोगों की संख्या काफी होती है। एक अनुमान के अनुसार प्रतिवर्ष छठ में यहां दो लाख से अधिक बच्चों का मुंडन होता है। मन्नत माने हजारों लोग यहां व्रत करने आते हैं। मुंडन के लिए यहां सूर्य मंदिर समिति के द्वारा टेंडर निकाला जाता है। जो इसका टेंडर लेता है वह नाई के कई ग्रुप बनाकर इस कार्य को पूरा करता है। प्रत्येक मुंडन पर सौ से 500 रुपए तक की राशि खर्च हो जाती है। मुंडन का कार्य सूर्य मंदिर परिसर और सूर्य कुंड परिसर के समीप होता है।
 कई लोग यहां पुत्र प्राप्ति की कामना से भी आते हैं। मान्यता है कि देव में छठ व्रत करने के बाद मन्नतों के अनुरूप भगवान भास्कर पुत्र की सौगात देते हैं। कुष्ठ रोग के निवारण के लिए भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि सूर्य कुंड में स्नान करने से कुष्ठ रोग खत्म हो जाता है। मुंडन, पुत्र प्राप्ति, कुष्ठ रोग निवारण आदि को लेकर लोग पहुंचते हैं।