नोएडा-ग्रेटर नोएडा ऐक्वा मेट्रो लाईन मेट्रो के लिए बना हुआ है घाटे का सौदा !

नोएडा। नोएडा- ग्रेटर नोएडा ऐक्वा लाईन मेट्रो का रूट यात्रियों को रास नहीं आ रहा है, जिससे यह घाटे का सौदा बना हुआ है। इस रूट पर निर्माताओं ने अनेक पेचिदगियों को छोड़ गए हैं। इस मेट्रो का रूट ऐसा बनाया गया है, जिससे अधिकांश यात्री मेट्रो की सफर की जगह बसों या अन्य परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर समझते हैं।



हालांकि घाटे के इस मेट्रो को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने ग्रेटर नोएडा दौरे के समय नाराजगी जता चुके हैं, फिर भी यह घाटे से उबर नहीं पा रहा है।
यह मेट्रो घाटे का सौदा इसलिए है की इसके निर्माण कर्ताओं ने अपने फायदे के लिए गलत रूट का चुनाव किया। यही वजह है कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा आने - जानेवाले यात्रियों को यह रूट सूट नहीं करता। ग्रेटर नोएडा से नोएडा बोटेनिकल गार्डेन आने के लिए एक्सप्रेसवे सीधा मार्ग है। जबकि मेट्रो से आने के लिए तकरीबन डेढ़ गुना अधिक की दूरी है। इसलिए यात्री एक्सप्रेसवे से अन्य साधनों से आते- जाते हैं।
हालांकि एक्वा लाईन को नोएडा के बॉटेनिकल गार्डेन से जोड़ने की योजना तो है, लेकिन मंदी की मार से प्राधिकरण अभी तक इस रूट को परवान चढ़ाने में विफल रहा है। हालांकि ऐक्वा लाईन मेट्रो स्टेशन को फीडर बसों से जोड़ने की योजना हवाई घोषणाओं से अधिक कुछ नहीं हुआ है। 


यहां एक्वा लाइन से ब्लू लाइन की डायरेक्ट कनेक्टिविटी नहीं होना एक मेजर इशू तो है ही। हालांकि हौज खास और कालका जी में भी काफी लंबा वाकिंग कॉरिडोर है, फिर भी वहां क्राउड होती है। एक और कारण ये भी है कि सेक्टर 144 से 148 तक का जो मेट्रो रूट है, वहां आबादी बहुत कम हैं। रुट में थोड़े बहुत बिल्डर प्रोजेक्ट हैं, वे भी अधूरे अटके पड़े हैं। सेक्टर 144 स्टेशन से अगर आपको दिल्ली आने के लिए मेट्रो में चढ़ना है तो दो -दो गढ्ढे खुदे हैं। उन्हें पार कर के मेट्रो में चढ़ना पड़ता है। इससे कई यात्री घायल भी हुए हैं। यात्रियों का साफ कहना है कि इस रूट बहुत सारी दिक्कतें हैं, जिस कारण वे अन्य साधनों का इस्तेमाल करते हैं।
इस लाईन पर प्रति साढ़े 7 मिनट पर मेट्रो की सुविधाएं हैं, जहां प्रतिदिन मेट्रो 213 फेरे लगाती है। इस रूट पर प्रतिदिन करीब 2 लाख यात्रियों के सफर करने की बात कही जाती है। बहरहाल, गलत रूट के कारण यह मेट्रो घाटे का सौदा बना हुआ है।