यूपी मेडिकल काउंसिल ने क्लॉउडनाइन के दो डॉक्टरों को दोषी माना, गर्भ में नवजात बच्चे की मौत की है वजह माना

** गर्भ में नवजात की मौत पर 5 महीने बाद यूपी मेडिकल काउंसिल ने दो डॉक्टरों को माना दोषी


**  नोएडा के क्लाउडनाइन अस्पताल में इंजीनियर महिला के गर्भ में ही नवजात की हुई थी मौत, गैर इरादतन हत्या का है केस दर्ज


नोएडा। इंसाफ की लड़ाई में समय तो लगता ही है। पर, जब इंसाफ मिलता है, तो न्याय की जीत होती है।  करीब 5 महीने पहले नोएडा के क्लाउडनाइन अस्पताल में गर्भवती महिला के मृत बच्चे के जन्म देने के मामले में दो डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। इस मामले में उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की समिति ने दोनों डॉक्टरों को दोषी माना है। समिति ने अपनी रिपोर्ट मेें कहा है कि डॉक्टर की घोर लापरवाही से ही नवजात की गर्भ में ही मौत हो गई। उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल की इस रिपोर्ट को रजिस्ट्रार की तरफ से डीएम, एसएसपी, सीएमओ और संबंधित अस्पताल को भेज दिया गया है। वहीं, मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट के बाद पीड़ित दंपती ने कहा कि अब उन्हें मामले में इंसाफ मिलने की उम्मीद बढ़ी है। वहीं, इस मामले में क्लाउडनाइन अस्पताल ने इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं किये जाने की बात कही है।


बता दें कि ग्रेटर नोएडा में एनआरआई रेजिडेंसी सोसायटी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकित गर्ग रहते हैं। इनकी पत्नी श्वेता कश्यप भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह पुणे स्थित इंफोसिस कंपनी में कार्यरत हैं। गर्भवती होने पर वह ऑफिस से मैटरनिटी लीव लेकर दिसंबर 2018 में ही ग्रेटर नोएडा में आकर रहने लगीं थीं। दिसंबर से ही इनका इलाज नोएडा सेक्टर-51 स्थित क्लाउडनाइन अस्पताल में चल रहा था। यहां सीनियर डॉक्टर प्रतिभा सिंघल इनका केस देख रहीं थीं। अंकित गर्ग की तरफ से नोएडा सेक्टर-49 थाने में दर्ज कराई एफआईआर के मुताबिक, डॉक्टर के कहने पर समय-समय पर चेकअप किया जा रहा था। अल्ट्रासाउंड व अन्य सभी रिपोर्ट के मुताबिक भ्रूण और मां दोनों हमेशा नॉर्मल रहे थे। 8 मार्च 2019 को आखिरी बार श्वेता कश्यप का चेकअप हुआ था। उस दिन भी सबकुछ नॉर्मल था। इसके अगले दिन ही 9 मार्च की रात करीब 9 बजे श्वेता को प्रसव पीड़ा होने लगी। इसके बाद 9:08 बजे फोन पर डॉ. प्रतिभा सिंघल से बात की तो उन्होंने तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी। रात  9:30 बजे श्वेता को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।



अंकित का आरोप है कि उस समय डॉ. प्रतिभा सिंघल नहीं थीं तो जूनियर डॉ. रितिक दीनानाथ ने चेकअप किया। रात 10:15 बजे बताया गया कि मां व बच्चे दोनों की रिपोर्ट नॉर्मल है। इसके बाद कोई डॉक्टर नहीं देखने आया। रात करीब 11:30 बजे काफी दर्द होने पर फिर से डॉ. प्रतिभा सिंघल व उनकी टीम के डॉक्टर को बताया गया लेकिन कोई नहीं आया। काफी शिकायत करने के बाद रात 12:10 बजे डॉ. रितिका ही देखने आईं तो बताया कि केस सीरियस हो गया है। जिसके बाद ऑपरेशन करने की बात हुई। इसके बाद भी 35 मिनट बीत जाने के बाद रात 12:45 बजे डॉ. प्रतिभा सिंघल अस्पताल पहुंची। उनके आने के 10 मिनट बाद बताया गया कि बेबी की हार्ट बीट बंद हो चुकी है और एक घंटे बाद मृत बच्चे का जन्म होना बताया गया। इस मामले में दोनों डॉक्टर व अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थाने में गैर इरादतन हत्या की एफआईआर दर्ज कराई गई थी।


इस मामले में अंकित गर्ग की शिकायत पर पहले नोएडा स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच की। इसके बाद पीड़ित दंपती ने मामले को यूपी मेडिकल काउंसिल और एनसीपीसीआर (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) में शिकायत की थी। हाल में ही एनसीपीसीआर के सदस्य भी अस्पताल में जांच करने आए थे। इस मामले में यूपी मेडिकल काउंसिल ने 5 अगस्त को बनाई रिपोर्ट में दोनों डॉक्टरों को दोषी बताया है।


डॉ. रितिक दीनानाथ को दोषी नहीं माना जा सकता क्योंकि उस दिन वे एक मात्र ड्यूटी डॉक्टर थीं और उन पर अधिक कार्यभार था। फिर भी उन्हें जवाबदेही मानते हुए सख्त चेतावनी देनी चाहिए। वहीं, डॉ. प्रतिभा सिंघल ने अपने मरीज के प्रति घोर लापरवाही बरती और स्थिति की गंभीरता को संभालने में विलंब किया जिसके कारण इंट्रायूटेरियन डेथ (गर्भ में मौत) हुई।


इसमें डॉ. प्रतिभा सिंघल व डॉ. रितिका दीनानाथ को भी चिकित्सकीय कर्तव्यों में चूक का दोषी पाया गया है। इसलिए उन्हें सचेत करते हुए भविष्य में चिकित्सकीय लापरवाही न करने की सख्त चेतावनी दी जाती है।