7 रंगों में रंगी है यह दुनिया


परमात्मा ने हमें यह जीवन उपहार स्वरूप दिया है. इसी उपहार के हिस्से अग्नि, वायु, जल, मिट्टी और आकाश से यह शरीर बना है. इन्हें पंचतत्व भी कहते हैं. शरीर को चलाने वाली एक शक्ति आत्मा है, जो मन, बुद्धि और संस्कारों से जीवन की गाड़ी को खींचती है और दूसरी प्राण शक्ति है, जो सात चक्रों में केंद्रित है. इन चक्रों पर ध्यान लगाकर हम स्वयं और वायुमंडल को पवित्र और मज़बूत बना सकते हैं. मन की शक्ति की बात तो हम पहले ही कर चुके हैं, अब बात करते हैं सात चक्रों की, जो मूलाधार से शुरू होकर सहस्रधारा तक चलते हैं. इन्हीं में छुपी हैं इंद्रधनुषी सात रंगों की शक्तियां.


सभी बीमारियां इन्हीं चक्रों के कमज़ोर होने से उत्पन्न होती हैं. पद्मासन में बैठकर लाल रंग पर ध्यान केंद्रित करके मूलाधार चक्र को जागृत करें. आपको शक्ति और सभी शारीरिक सुखों का अनुभव होगा. थोड़ा ऊपर उठें और संतरी रंग पर ध्यान लगाएं. यह रंग आपको पवित्रता का अनुभव देगा. शक्तियों का संचय करके ऊपर उठें तो पहुंचेंगे नाभि चक्र पर. नाभि चक्र सुख प्रदान करने वाला है. इससे पीला रंग जुड़ा है. इस पर ध्यान केंद्रित करने से चिंता, भय और दु:ख दूर होते हैं. साथ ही पाचन शक्ति बढ़ेगी और सुख की अनुभूति होगी. हृदय के बीच में है हृदय चक्र, जो प्रेम की अनुभूति देता है. हरे रंग पर ध्यान केंद्रित करने से हृदय चक्र जागृत होता है. मन और शरीर को स्वस्थ करने वाला यह चक्र ब्लड प्रेशर, दमा और हृदयरोग से बचाता है. फिर आता है विशुद्धि चक्र. हल्के नीले रंग का यह चक्र वाणी को माधुर्यता प्रदान करता है और शक्ति का अनुभव कराता है. यह थायरायड, गले और कान की बीमारियों से बचाता हुआ बातचीत करने की क्षमता बढ़ाता है. माथे पर स्थित है आज्ञा चक्र. गहरे नीले रंग पर ध्यान केंद्रित करके आप अपनी संकल्प शक्ति को अकल्पित सीमा तक बढ़ा सकते हैं.



यह चक्र आपकी अंत:शक्ति को बढ़ाता है. आपके और परमात्मा के बीच के द्वार खोलता हुआ सिर के ऊपर स्थित सहस्रधारा चक्र बैगनी रंग पर ध्यान केंद्रित करने से जागृत होगा. आध्यात्मिक शक्तियों का अपार भंडार देता यह सहस्रधारा चक्र असीम सुखों का अनुभव देता है. इस चक्र पर केंद्रित होते ही आप जीवन के सत्य को समझ जाते हैं. आप भी रंगों और चक्रों के रिश्तों को जानकर जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति की ओर बढ़ें.