ऐतिहासिक गाथाओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है भृगुरारी

ऐतिहासिक गाथाओं से भरा पड़ा है 
औरंगाबाद जिले का भृगुरारी
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर ऋषि भृगु मुनि के साधना स्थल रही पुनपुन नदी के तीमुहान संगम तट पर  आज हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और कुछ लोग डुबकी लगा रहे हैं। श्रद्धालु स्नान करने के बाद नकटी भवानी और माँ छिन्नमस्तिके मंदिर में पूजा अर्चना की। 



पूर्णिमा के दिन अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं कि भीड़ स्नान करने के लिए लग गई । बताया जाता है कि गंगा स्नान पर्व पर भृगुरारी के तीमुहान संगम में स्नान करने का महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यहां स्नान करने से पाप का नाश होता है। 



 भृगुरारी में मंदार पुनपुन संगम है जहां भृगुऋषि का आश्रम रहा है। यहां देवताओं का अध्ययन केंद्र था। वेद ज्योतिष भृगुसंघिता नामक ग्रंथ की रचना किया गया था। इस ग्रंथ में विश्व के सभी जीवप्राणीयों का जन्म कुंडली है। भृगुरारी के तीमुहान संगम घाट पर त्रेता युग में भगवान श्रीराम ने स्नान किया था। अपने हाथों से मंदारेश्वर महादेव लींग की स्थापना कर पूजा अर्चना किया था। मंदिर के समीप नकटी भवानी की मंदिर है। भृगुरारी में शुक्राचार्य ने प्रथम उपासना अपनी मां को किया था। भृगु ऋषि, शुक्रराचार्य की मां नकटी भवानी है। वहीं बटाने नदी के जम्होर में विष्णु मंदिर, मदार संगम के भृगुरारी में भृगुऋषि व नकटी भवानी का मंदिर है, जिसका वर्णन पौराणिक ग्रंथों में आज भी पढने को मिलता है। 
 भृगुरारी मेला में पूजा -अर्चना के बाद सुथनी, सिंघाड़ा का प्रसाद स्वरुप खाया जाता है। यहां भेंड के बालों का बना कम्बल सस्ते दामों में मिलती है।