मनीष चौरसिया जिन्हें दृष्टिहीनता की बाधकता भी नहीं झुका सकी

दिव्य जनून : दृष्टिहीनता की बाधकता भी मनीष चौरसिया के लिए आज है सफलता का सोपान
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गर्व है चौरसिया समाज को ऐसे सपूत के शानदार उपलब्धि पर
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मुश्किलें दिलों के इरादों को आजमाएंगी,
आँखों के पर्दों को निगाहों से हटाएँगी,
गिरकर भी हम को संभलना होगा,
ये ठोकरें ही हमको चलना सिखाएंगी।



 मानव का जीवन कठिनाईयों और चुनौतियों से भरा होता है। यह चुनौती तब और बढ़ जाती है जब दृष्टिहीनता अथवा किसी अन्य तरह की दिव्यांगता हो। समाज के लोग भी दिव्यांगों को प्राय: हेयदृष्टि से देखकर उनकी उपेक्षा तथा अपमान करते हैं लेकिन जिसमें बुलंद हौसले का बल और दृढ़ संकल्प हो वह इन सभी बाधाओं को पार कर सफलता के परचम लहराता है। ऐसे ही सफल और साहसी दृष्टिहीन सिंगरौली के मनीष चौरसिया हैं। उन्होंने दृष्टिहीनता की चुनौती से पार पाकर स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया। मनीष दृष्टिहीनता के बावजूद सिंगरौली में दृष्टिहीन बच्चों के स्कूल का सफल संचालन कर रहे हैं। दृष्टिहीन बच्चों को शिक्षा तथा विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दृष्टिहीन होने के बावजूद दृष्टिहीन बच्चों के जीवन में शिक्षा और स्वरोजगार की ज्योति जलाई है।


सिंगरौली के रहने वाले मनीष चौरसिया की दृष्टि कक्षा 5 वीं पहुंचते-पहुंचते 90 प्रतिशत चली गई। दुर्भाग्य से उनके तीन भाई भी दृष्टिहीनता के शिकार हैं। पूरा परिवार नाम मात्र की आमदनी पर बड़ी मुश्किलों से गुजारा कर रहा था। समाज के लोग भी ""बिना आंख का बेकार बच्चा परिवार का बोझ है'''''''' कहकर ताने देते थे। मनीष ने 90 प्रतिशत दृष्टिहीनता क बावजूद केवल 11 साल की उम्र में ऑटो पार्ट्स तथा सर्विस सेंटर में काम करके तकनीकी कौशल हाशिल किया। मनीष ने 2012 में बैढ़न में चिल्ड्रन प्ले स्कूल खोला उन्हें 2018 में प्राइवेट आईटीआई कालेज में संवद्धता मिल गई। उनका दृष्टिहीन बच्चों का स्कूल अच्छा चल रहा है। उन्होंने बच्चों के लिए 15 लाख रूपये का ऋण उद्योग विभाग के माध्यम से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से लिया। जिससे उन्होंन मिनी बस खरीदी मनीष दृष्टिहीन होने के बावजूद मोबाइल एप्प के माध्यम से मोबाइल में संदेश भेजते हैं तथा पढ़ते हैं।


 दृष्टिहीन मनीष कि सफलता समाज के लिए बड़ा उदाहरण है। उनके मन में हमेशा कुछ नया करने और असंभव को संभव बनाने का जुनून रहता है। मनीष दृष्टिहीन होने के बावजूद न केवल सफल स्कूल संचालक हैं बल्कि अन्य नेत्रहीन बच्चों को भी शिक्षा और स्वरोजगार के साथ समाज में गर्व के साथ जीने का हक दें रहे हैं।
मनीष चौरसिया के इस साहसी कार्य पर एक लाईक जरूर करें।
सुरेश चौरसिया( पत्रकार)  -9810791027.