राम ही बनाएंगे भगवान श्रीराम की विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा, अयोध्या में सरयू नदी के किनारे होगी स्थापित

**  राम ही बनाएंगे भगवान श्रीराम की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा 



नोएडा। राम वी. सुतार ही वह शख्स हैं जिन्होंने विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनाई है। वे देश के महापुरुषों की प्रतिमा बनाते बनाते खुद भी एक महान हस्ती बन चुके हैं। स्टैच्यू की दुनियां में उनके नाम का शुमार है।


वे एक बार फिर चर्चा में हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उन्हें  विश्व की सबसे ऊंची भगवान श्रीराम मूर्ति बनाने आग्रह किया था। इस पर उन्होंने काम शुरू किया है। इस प्रतिमा की अनुकृति बन चुकी है और स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन अभी तक सरयू नदी के किनारे उचित जमीन न मिलने पाने के कारण से निर्माण शुरू नहीं हो सका है।


बता दें कि भगवान राम की मूर्ति का निर्माण सरयू नदी के किनारे 100 हेक्टेयर जमीन में किया जाना है। इसमें 20 मीटर ऊंचा चक्र होगा। मूर्ति 50 मीटर ऊंचे बेस पर खड़ी होगी। बेस के नीचे ही भव्य म्यूजियम बनाया जाएगा। जहां टेक्नोलॉजी के जरिये भगवान विष्णु के सभी अवतारों को दिखाया जाएगा। यहां डिजिटल म्यूजियम, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग, लाइब्रेरी, रामायण काल की गैलरी आदि भी प्रस्तावित है।




राम वनजी सुतार का जन्म 19 फ़रवरी 1925 को महाराष्ट्र में धूलिया जिले के गोन्दुर गांव में एक गरीब परिवार में हुआ।उनके पिता वनजी हंसराज जाति व कर्म से बढ़ई थे। 1952 में उनका विवाह प्रमिला के साथ हुआ जिनसे 1957 में एकमात्र पुत्र अनिल रामसुतार का जन्म हुआ।


रामसुतार ने रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर मुम्बई स्थित जे०जे०स्कूल ऑफ आर्ट में दाखिला लिया और 1953 में इसी स्कूल से मॉडेलिंग में सर्वोच्च अंक अर्जित करते हुए मेयो गोल्ड मेडल हासिल किया। मॉडेलर के रूप में औरंगाबाद के आर्कियोलोजी विभाग में रहते हुए 1954 से 1958 तक वे अजन्ता व एलोरा की प्राचीन गुफाओं में मूर्तियों के पुनर्स्थापन (रेस्टोरेशन) का कार्य किया।


1958-59 में आप वे भारत सरकार के सूचना मंत्रालय के दृश्य श्रव्य विभाग में तकनीकी सहायक भी रहे। 1959 में उन्होंने स्वेच्छा से सरकारी नौकरी त्याग दी और पेशेवर मूर्तिकार बन गये। वे आजकल अपने परिवार के साथ नोएडा में निवास करते हैं और इस आयु में भी पूर्णत: सक्रिय हैं।




वैसे, तो उन्होंने बहुत सी मूर्तियाँ बनायीं, किन्तु उनमें से कुछ उल्लेखनीय योगदान इस प्रकार हैं:



  • 45 फुट ऊँची चम्बल देवी की मूर्ति गंगासागर बाँध मध्यप्रदेश भारत

  • 21 फुट ऊँची महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति अमृतसर

  • 18 फुट ऊँची सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति संसद भवन नई दिल्ली

  • 17 फुट ऊँची महात्मा गांधी की मूर्ति गान्धीनगर गुजरात

  • 9 फुट ऊँची भीमराव अंबेडकर की मूर्ति  जम्मू

  • भारत के राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा की आवक्ष प्रतिमा




93 वर्ष की आयु में उनके अन्दर बैठा मूर्तिकार आज भी अपने कला-कर्म के प्रति निष्ठावान है। 45 फुट ऊँची चम्बल देवी की मूर्ति बनाकर इतिहास रचने वाले इस मूर्तिकार के दिल में एक ही तमन्ना थी कि वे कुछ ऐसा करके जायें, जिसे देखने के लिये देश-विदेश से लोग भारत आयें। उन्हें स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने का मौका मिला। मूर्तिकार राम वनजी सुतार ने विश्व की इस सबसे ऊंची सरदार पटेल जी की मूर्ति का डिजाइन तैयार किया और बतौर मूर्तिकार मुख्य भूमिका निभाई है। राम वंजी सुतार के बेटे अनिल सुतार ने भी मूर्ति का डिजाइन तैयार करने में योगदान किया।



 राम वी. सुतार ने स्कूल के दिनों में ही पहली बार जिस गांधी को बनाया था, वह हंसते हुए गांधी थे। वे बताते हैं कि उनके पास गांधी की एक तस्वीर थी। उसमें वे हंस रहे थे। मेरे एक टीचर को गांधी का सुन्दर तस्वीर चाहिए था जिसे मैंने बनाया। फिर उस बस्ट की एक और कॉपी भी बनाई। उस समय मुझे 300 रुपये मिले थे।" स्कूल के बाद जब वे मुंबई के 'जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट' में मूर्तिशिल्प के छात्र हुए तो उनकी कला की दुनिया बड़ी होती गई। उनकी कला का आकार भी बड़ा होता गया। कुछ छोटे-बड़े काम और एलोरा में पुरातत्व विभाग की नौकरी के बाद लगभग 1959 में सुतारजी दिल्ली आए तो गांधी को देखने, समझने और महसूस करने के कई दरवाजे खुले। 


वे खुद बताते हैं कि "दुनिया के किसी भी हिस्से में सत्य और अहिंसा का जिक्र महात्मा गांधी को याद किए बिना पूरा नहीं होता। मुझे गांधीजी के अहिंसा मंत्र ने बहुत प्रभावित किया। गांधी जी के दर्शन में हर समस्या का आसान उपाय है। वह बेहद प्रैक्टिकल हैं। उनके दर्शन की जो भाषा है, उसे समझना आसान है।"


श्री सुतार जी को अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत सरकार ने उनकी कलात्मक शिल्प साधना को सम्मानित करते हुए सन 1999 में पद्मश्री से अलंकृत किया। उन्हें पद्मभूषण भी मिला है।