दिल्ली हॉकी टीम के कोच अभिषेक चौरसिया बन गए हैं युवाओं के लिए प्रेरक

दिल्ली हॉकी टीम के कोच अभिषेक चौरसिया आज युवाओं के लिए बन गए हैं प्रेरक
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न भीड़ हो जिसके वो अक़्सर तन्हा में चलते हैं
रौशन करने को क़िस्मत अपनी सूरज की तरह जलते हैं
कितनी भी हो कठिन राह मगर न कभी वो पीछे मुड़ते हैं
पा लेते हैं क़ामयाबी को जो वक़्त मुताबिक़ ढ़लते हैं।


आज कामयाब होना किसका ख़्वाब नहीं होता। आज के समय में हर इंसान कामयाब होना चाहता है। पर यह क़ामयाबी मुकम्मल आसानी से हासिल नहीं होती। इसके लिए बहुत मेहनत के साथ ही एक बढ़िया योजना का होना बेहद जरूरी है और साथ में जरूरी है क़ामयाबी हासिल करने के लिए प्रेरित होना। प्रेरणा एक ऐसी चीज़ है जो इंसान को कुछ भी करवा सकती है।



हम बात कर रहे हैं बिहार के रोहतास जिले के नोखा नगर पंचायत के एक लाल की जिन्होंने दिल्ली हॉकी टीम का कोच बनकर नोखा ही नहीं, पूरे जिले और बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं। 


वह सीमित संसाधन रहने के बाद भी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटा और दिन प्रतिदिन अपनी खेल में निखार लाता गया। इसके कारण वह आज दिल्ली हॉकी टीम का कोच बनकर एक इतिहास रच दिया है।



 बताते चलें कि नोखा नगर पंचायत के वार्ड नं 5 के निवासी संजय कुमार दीपक का पुत्र अभिषेक कुमार अपनी पढ़ाई नोखा से ही शुरू की। वह शुरू से ही हॉकी का शौकीन थे। रोहतास जिले में इस खेल का कोई संसाधन नहीं होने के कारण भी वह अपनी हार नहीं माना। सबसे पहले वह बिहार टीम का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उनकी खेल की प्रतिभा निखरती गई। आज वह दिल्ली हॉकी टीम का कोच बन कर जिला गांव ही नहीं, पूरे बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं।



अभिषेक के पिता एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने पुत्र की हौसला को कम नहीं होने दिया और विषम परिस्थिति में भी उसका हौसला बढ़ाते चले गए। आज उसी का परिणाम है अभिषेक दिल्ली हॉकी टीम का कोच बन कर नोखा का नाम रौशन किया है।



 अभिषेक ने जिस तरह ग्रामीण परिवेश में अपनी सफलता का परचम लहराया है। उससे हर ग्रामीण युवा के सबब बन गया है। नोखा के सरस्वती शिशु मंदिर में दसवीं तक अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जैन कॉलेज आरा में अपनी आगे का पढ़ाई पूरी की। वह शुरू से ही फुटबॉल एवं हॉकी का शौकीन था। अपने क्षमता एव प्रदर्शन के बल पर बिहार में हॉकी टीम में जगह बना लिया। इसके बाद अभिषेक ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 



अभिषेक ने इससे पहले कई जगहों पर अपनी कोच की भूमिका निभा कर खिलाड़ियों को निखारने का कार्य कर चुके हैं। उन्होंने के केंद्रीय विद्यालय दानापुर कैट, डीएवी खगड़िया,केंद्रीय विद्यालय खगड़िया,महिला कॉलेज जम्मू, यू 14 बिहार की टीम को कोचिंग देकर खिलाड़ियों को प्रदर्शन निखारने का कार्य किया है। अभिषेक को वर्ष 2013 में जम्मू कश्मीर स्टेट टीम में जगह मिल गई थी। जिसके बाद सीनियर नेशनल व स्टेट चैंपियनशिप खेलने को मिला। उसी वर्ष अच्छे प्रदर्शन के बदौलत उन्हें सीएजी दिल्ली में वरीय लेखापाल की नौकरी मिली है।



अभिषेक के पास आज उपलब्धियों के दर्जनों मेडल मौजूद हैं। पर, सबसे बड़ा मेडल उनकी एक अच्छे इंसान का होना है। वे युवाओं में जोश जगाकर कुछ करने, कुछ बनने की जज़्बा जगा रहे हैं। निश्चय ही अभिषेक चौरसिया समाज के गौरव, अभिमान हैं। वे चौरसिया समाज के ऐसे रत्न हैं जो खुद चमक रहे हैं और समाज के चमकने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे आज के युवा पीढ़ी के प्रेरक बने हुए हैं।
          
                   सुरेश चौरसिया, पत्रकार
                          981079102
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