एस.एस. सिन्हा कॉलेज अपनी 75 वीं वर्षगांठ की भव्यता के लिए हुआ तैयार

औरंगाबाद जिले की गौरवशाली एस.एस. सिन्हा कॉलेज  75 वीं वर्षगांठ की भव्यता लिए हुआ तैयार , राष्ट्रपति के गरिमामय उपस्थिति हेतु दिया अनुरोध- पत्र
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                     सुरेश चौरसिया
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औरंगाबाद. औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर औरंगाबाद के प्रतिष्ठित महाविद्यालय सच्चिदानन्द सिन्हा कॉलेज की 75 वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि गरिमामयी उपस्थिती हेतु अनुरोध किया है.



 औरंगाबाद जिले का शान इस कॉलेज का पूर्ण नाम है सचिदानंद सिन्हा कॉलेज है जो अधिकतर लोगो के द्वारा सिन्हा कॉलेज के नाम से जाना जाता है. इस कॉलेज का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है. इस कॉलेज की स्थापना सन 1943 ई. में यहाँ के स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्त्ता और गरीब लोगो के मसीहा कहे जाने वाले श्री अखौरी कृष्णा प्रकाश सिन्हा, अलियास त्रिपुरारी बाबु और उनके जिगरी दोस्त एवं मोरल सहायक दोस्त डॉ सच्चिदानंद सिन्हा तथा उस समय के महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. अनुग्रह नारायण सिन्हा के काफी सार्थक प्रयास बदौलत किया गया था.


 इस कॉलेज के स्थापित होने के बाद इस यूनिवर्सिटी का संबद्ध पटना यूनिवर्सिटी जुड़ा. उस समय के तत्कालीन वाईस चांसलर डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे. उन्होंने उस समय के एक छोटे से सब डिवीज़न टाउन औरंगाबाद जिले में एक बेहतरीन कॉलेज के सपने को साकार किया और पटना यूनिवर्सिटी से इसका मान्यता 1944 में प्राप्त करवाया. 


एस. सिन्हा कॉलेज औरंगाबाद मे मार्किट से 3 किलो मीटर दूर स्थित है. आज इसके कैंपस में मौजूद हरे- हरे पेड़ और सुंदर कैंपस से मन को मोह लेता है. यह कॉलेज  कुल 20 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. 


आज यह मगध यूनिवर्सिटी का सबसे पुराना और ऐतिहासिक कॉलेज है. कॉलेज में तीन स्ट्रीम साइंस , कॉमर्स, सोशल साइंस में कुल मिलकर 16 विषयों में स्टूडेंट्स को स्टडी करने का मौका मिलता है. 


इतना ही नहीं यहाँ वोकेशनल डिग्री कोर्सेज भी सन 2000 से सफलतापूर्वक अध्ययन किया जाता है. इसके आलावा यू. जी. सी. स्पॉन्सर्ड वोकेशनल कोर्सेज जैसे बचेओर ऑफ़ सेल्स प्रमोशन और सेल्स मैनेजमेंट तथा दूसरा सेल्फ finnced वोकेशनल कोर्सेज बैचलर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन, बैचलर ऑफ़ बिज़नस मेनागेमेंट बैचलर ओ बायोटेक्नोलॉजी 2007-2008 से शुरुआत भी किया गया है.


इस कॉलेज में स्टूडेंट की संख्या 15-20 हजार बताए जाते हैं. यहां के छात्र अपनी स्टडी पूरी कर प्रदेश और देश में इस कॉलेज का नाम रोशन करते हैं. इसका एक जीता जगता मिसाल हैं श्री हरगोविंद सिंह और प्रोफेसर मंगल दुबे जो मगध यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर इसी महाविधालय से अध्ययन कर के बने थे.
सिन्हा कॉलेज का बुनियादी ढांचा अच्छा है। लैब्स भी व्यवस्थित हैं। नियमित संकाय और एचओडी यहां हैं। कक्षाएं अच्छी तरह से बनाई गई हैं। पर, यह एक बहुत पुराना कॉलेज है और कॉलेज आधुनिक दिखने वाला नहीं है। बेंच भी पुराने स्टाइल के हैं। लेकिन इस कॉलेज में भीड़ बहुत बड़ी है, क्योंकि बहुत सारे छात्र हैं। इसके अलावा, परिसर बहुत अच्छा है और बहुत बड़ा है। यह मगध विश्वविद्यालय, बोध गया (बिहार) के तहत सबसे पुराना कॉलेज है, और वर्ष 1974 में इस विश्वविद्यालय की घटक इकाई में परिवर्तित हो गया।
मैं भी इस कॉलेज का छात्र रहा हूं और इसी कॉलेज से ऑनर्स और M.A किया हूं. तब इस कॉलेज के प्राचार्य सीनेश सिंह थे. वे स्वयं अनुशासित थे और छात्रों को अनुशासन में रखते थे. इस कॉलेज से ना जाने कितने छात्रों के भविष्य संवरा है और उनके जीवन को नई ऊंचाइयां प्रदान किया है. हमें गर्व है ऐसे कॉलेज से शिक्षा हासिल कर आज हम पत्रकारिता के इस मुकाम पर हैं.
संभवत: आप भी होंगे. आप यदि इस कॉलेज के छात्र रहे हैं, तो कमेंट या लाइक जरूर करें. धन्यवाद !