ग्रेटर नोएडा के कैलाशपुर गांव में किसान सभा ने किया पंचायत का आयोजन

**   किसानों के विभिन्न मुद्दों व लंबित मांगों पर आंदोलन को तेज करने के लिए किसान सभा ने किया पंचायत का आयोजन



ग्रेटर नोएडा। कैलाशपुर गांव में अखिल भारतीय किसान सभा की गांव कमेटी ने पंचायत का आयोजन किया। पंचायत का आयोजन आजाद बीडीसी ने अपनी बैठक पर किया। पंचायत की अध्यक्षता मुनीम ने की। पंचायत का संचालन कैलाशपुर गांव कमेटी के अध्यक्ष आजाद बीडीसी ने किया।


पंचायत में ब्रजवीर सिंह भाटी, चमन सिंह, गजराज सिंह, करतार सिंह, रघु देव, सुनील भाटी ,सोमेंद्र भाटी सहित सैकड़ों किसान शामिल रहे। पंचायत में अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कमेटी के संयोजक वीर सिंह नागर, सह संयोजक वीर सिंह इंजीनियर, मिलक लच्छी की कमेटी के अध्यक्ष वीरसेन नागर, प्रगतिशील जन आंदोलन के नेता विजेंद्र सिंह, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हरेंद्र खारी, प्रवक्ता एडवोकेट अजय चौधरी, डॉ रुपेश वर्मा ने अपना विचार रखा।  


कैलाशपुर गांव के निवासियों ने प्राधिकरण द्वारा कैलाशपुर सहित अन्य 16 गांव की जमीन की खरीद के संबंध में जमीन के भाव अत्यंत कम होने पर असंतोष प्रकट किया। वक्ताओं ने बोलते हुए कहा पिछले 5 वर्ष से प्राधिकरण द्वारा जमीनों की खरीद के रेट नहीं बढ़ाए गए हैं । कैलाशपुर गांव की कमेटी के अध्यक्ष आजाद बीडीसी व संयोजक ब्रजवीर सिंह जी ने असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि कानूनन हमारे हकों का हनन किया जा रहा है। हमारी भूमि पुश्तैनी भूमि है। हमारी भूमि के भाव कानूनन बाजार भाव के चार गुना हमें मिलना चाहिए व हर प्रभावित किसान  को अनिवार्य तौर पर रोजगार व अन्य लाभ मिलने चाहिए। परंतु प्राधिकरण जानबूझकर किसानों के साथ छल कर रहा है व किसानों की भूमि को सस्ते में हड़प कर पूंजीपतियों को आवंटित करना चाहता है। ऐसा हम हरगिज़ नहीं होने देंगे व कैलाशपुर के किसान सभी गांवों के किसानों के संपर्क में हैं। एक बड़ी पंचायत का आयोजन कर सबको संगठित किया जा रहा है।


 


किसान सभा के नेतृत्व में ज्ञापन देकर अपनी मांगे प्राधिकरण के समक्ष बुलंद करने की योजना है। यदि प्राधिकरण ने किसानों के कानूनी हकों को नहीं दिया तो किसान उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने प्राधिकरण पर आरोप लगाया कि मेरठ जिले में जहां पर जमीनों के बाजार भाव ₹500000  प्रति बीघा है वहां पर मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए ₹7000000 प्रति बीघा की दर से जमीनों की अधिग्रहण हुआ है, जबकि गौतमबुद्धनगर में कैलाशपुर गांव जमीनों की खरीद-फरोख्त ₹3000 ₹4000 और ₹5000 प्रति वर्ग मीटर की दर से हो रही है। ऐसे में नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार जमीन के भाव बाजार भाव के 4 गुने के आधार पर ₹15000 प्रति वर्ग मीटर होने चाहिए।


किसान सभा के महासचिव हरेंद्र खारी ने किसानों को अवगत कराया कि कानूनन पिछले 3 वर्षों में जिस दर पर जमीन की खरीद हुई है उसमें सबसे अधिक रेट की आधी रजिस्ट्री के औसत का 4 गुना रेट होना चाहि । 4 गुना रेट देने का प्रावधान नए भूमि अधिग्रहण कानून में किया गया है, परंतु हमारे यहां प्राधिकरण ने किसानों का शोषण करने के लिए जमीनों के भाव मनमाने तरीके से कम रखे हैं। यही नहीं नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार प्रभावित किसानों को योजना प्रभावित परिवार माना जाता है और प्रत्येक प्रभावित परिवार को उस जमीन पर लगने वाली फैक्ट्रियों अथवा पैदा होने वाले रोजगार में अनिवार्य तौर पर रोजगार मुहैया कराया जाता है। हम सब किसानों को संगठित होकर ₹15000 मीटर जमीन की खरीद के भाव तय करने एवं प्रत्येक प्रभावित परिवार को अनिवार्य रोजगार देने की मांग करनी चाहिए। यह किसानों का कानूनी हक है प्राधिकरण द्वारा पूंजी पतियों व बिल्डरों के हक में किसानों का शोषण किया जा रहा है व उनकी पुश्तैनी जमीनों को सस्ते दाम पर हड़प कर कमीशन खाकर ऊंचे दाम पर पूंजी पतियों को आवंटित करने की योजना है।


किसान सभा के सह संयोजक वीर सिंह इंजीनियर ने बोलते हुए कहा कि किसान सभा किसानों का देशव्यापी ईमानदार और जुझारू संगठन है। किसान सभा ईमानदारी से किसानों की समस्याओं को हल कराने के लिए संकल्पबद्ध है।कैलाशपुर गांव में मुआवजा सहित रोजगार की समस्या को उठाकर हल कराने का कार्य किया जाएगा। डॉ रुपेश वर्मा ने कैलाशपुर गांव के किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि कैलाशपुर गांव के किसान जागरूक हैं जिन्होंने इस पंचायत का आयोजन ऐसे समय पर किया है और अपनी वास्तविक समस्या प्रकट की है। अखिल भारतीय किसान सभा की जिला कमेटी कैलाशपुर सहित सभी 16 गांवों में जमीनों के भाव नए भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर तय करने व रोजगार सहित अन्य लाभ देने की मांग करती है । प्राधिकरण क्षेत्र के 16 गांव में भूमि की खरीद के भाव नए भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार तय किए जाएं व प्रभावित किसानों के परिवारों को यहां पर लगने वाली फैक्ट्रियों में अनिवार्य रूप से रोजगार मुहैया कराने की नीति बनाई जाए। ऐसा न किए जाने पर किसान सभा सभी 16 गांवों के किसानों के जमीनों के रेट कानूनी रूप से तय करने के लिए व रोजगार सहित अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए आंदोलन करेगी। 


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