संस्कृत भाषा ज्ञान का श्रोत है

नोएडा। सेक्टर 12 स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आवसीयह: भाषा प्रबोधन वर्ग: कार्यशाला शनिवार को प्रथम दिन आयोजित किया गया। उद्घाटन के साथ ही 5 दिनों का संस्कृत बोलने का पाठ्यक्रम संचालन किया गया जिसमें सिर्फ संस्कृत का उच्चारण किया जाएगा।



इस प्रबोधन में संस्कृत की गरिमा को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रबोधन वर्ग में शामिल प्रशिक्षण लेने वाले के लिए लाभ यह होगा कि वे संस्कृत में लगातार बातचीत कर सकते हैं। संस्कृत को संस्कृत के माध्यम से पढ़ सकते हैं। संस्कृत के वातावरण में जी सकते हैं और संस्कृत का व्यवहारिक व्याकरण ज्ञान अर्जित कर सकते हैं।
इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है लेकिन आज कहीं पर भी संस्कृत माध्यम से पाठन नहीं होता। 
वक्ताओं ने कहा कि भाषा का जीवन काल 800 वर्षों का होता है। जब भाषा का परिवर्तन होता है तब ज्ञान का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यदि ज्ञान अधिकाधिक पाना है तो भाषा का ज्ञान आवश्यक है। संस्कृत भाषा ज्ञान का श्रोत है। संस्कृत भाषा स्थिर माध्यम भाषा अस्ति।


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