एमिटी विश्वविद्यालय में उभरते मीडिया प्रतिमान पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

**   एमिटी विश्वविद्यालय में उभरते मीडिया प्रतिमान पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ



नोएडा। छात्रों को उभरते मीडिया के संर्दभ में जानकारी प्रदान करने हेतु एमिटी स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन एंव एमिटी स्कूल ऑफ फिल्म एंड ड्रामा द्वारा उभरते मीडिया प्रतिमान पर अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन एफ ब्लाक सभागार, एमिटी विश्वविद्यालय में किया गया। इस अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ टेक्सास विश्वविद्यालय के सोशियल जस्टीस इनिशिएटिव के निदेशक  प्रो अरविंद सिंद्यल, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के मीडिया एंव गर्वनेंस के सेंटर फाॅर कल्चर के संस्थापक निदेशक प्रो विश्वजीत दास, सीएनएन नेटर्वक 18 के मैनेजिंग एडिटर भूपेंद्र चौबे, लोकसभा टीवी के सीईओ आशीष जोशी, नार्थम्पटन विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ आर्ट, साइंस एंड टेक्नोलाॅजी कीे डिप्टी डीन प्रो केट विलियम्स, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनीवर्सीटी के ज्वांइट सेके्रटरी डा आलोक कुमार मिश्रा, एमिटी स्कूल आॅफ फिल्म एंड ड्रामा की चेयरपरसन श्रीमती पूजा चैाहान, सुश्री महताब चौहान एंव एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा (श्रीमती) बलविंदर शुक्ला ने पारंपरिक दीप जलाकर किया।


टेक्सास विश्वविद्यालय के सोशियल जस्टीस इनिशिएटिव के निदेशक प्रो अरविंद सिंद्यल ने छात्रों को संबोधित करते हुए ट्रांस मीडिया की शक्ति के बारे मे बताया और  कहा पिछले कुछ सालों में विभिन्न मंचो पर कथा कहने के क्षेत्र में परिवर्तन आया है। विक्टोरियन युग के अंग्रेजी उपन्यासकार चाल्र्स डिकेन के कार्यो के बारे में बताते हुए कहा कि चाल्र्स डिकेंन को कथात्मक आख्यान का पिता कहा जाता है जिन्होनें ‘‘प्रिकव्रिक’’ से कथात्मक आख्यान को क्रमबद्धता दी और समय के अनुरूप कम दाम में उपलब्धता हुई। प्रो सिंघल ने कहा कि महात्मा गांधी द्वारा दांडी मार्च का नेतृत्व करके कथा अनुनय का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया। उन्होनें नये युग के कथा कहने की संकल्पना पर छात्रो से कहा कि हम डिजिटलीकरण से बृहद स्क्रीन से छोटे स्क्रीन पर बढ़ रहे है और मात्र एक क्लिक से सूचना प्राप्त कर रहे है। सोशियल मीडिया ने समाजिकता को प्रभावित किया है।


जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के मीडिया एंव गर्वनेंस के सेंटर फाॅर कल्चर के संस्थापक निदेशक प्रो विश्वजीत दास ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि टिव्टि करना कोई पत्रकारिता नही है और इससे कोई पत्रकारिता के आयाम नही स्थापित हो रहे है। इसमे खबर तो है किंतु पत्रकारिता नही। पत्रकारिता एक जिम्मेदारी भरा काम है जिसे पूर्ण सर्मपण, निष्ठा भाव से किया जाता है। प्रो दास ने कहा कि हमें अपने इतिहास से कुछ सीखना चाहिए।


सीएनएन नेटर्वक 18 के मैनेजिंग एडिटर  भूपेंद्र चौबे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मोबाइल, मीडिया का भविष्य है। आज न्यूज चैनलों चल रही खबरों में आ रहे वायरल विडियो, सोशियल मीडिया से प्राप्त हो रहे है। किसी भी जानकारी को पब्लिक डोमेन पर पोस्ट करने से पूर्व उसकी सत्यता को जांच ले और अपनी जिम्मेदारी को समझ कर विडियों को पोस्ट करें। आज तकनीकी के बदलते क्षेत्र ने ना केवल मीडिया बल्कि सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। श्री चैबे ने कहा कि आज तकनीकी ने पुलिस प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है। पत्रकारिता के क्षेत्र मे हम लोगों तक सुचना पहंुचाने से पहले उसकी सत्यता की जांच कर लेते है इसी तरह पब्लिक फोरम पर कोई बात पहुंचाने से पूर्व उसकी सत्यता को दो बार जांच ले। उन्होने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन छात्रों के सुनहरे भविष्य में सहायक होगें।


लोकसभा टीवी के सीईओ आशीष जोशी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता के प्रतिमान उभर नही रहें है बल्कि खिसक रहे है। आजादी से पूर्व पत्रकारिता का एक उददेश्य था आज व्यवसाय बन गया है। आज आजादी के 70 साल बाद पत्रकारिता को विकास के कार्यो में जुड़ जाना चाहिए। टीवी एंव अखबार की बजाए सोशियल मीडिया के माध्यम ये खबरें लोगों तक जल्दी पहंुच रही है। सिक्के की तरह खबरों के दो पहलु होते है एक दिखता है दूसरा नही। एक ही खबर पर अलग अलग चैनल अलग अलग राय रखते हुए देखे जा सकते है। मीडिया को हर पक्ष दिखाना चाहिए। उन्होने छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि ज्ञान का विकल्प नही है इसलिए खूब पढ़े और जानकारी प्राप्त करें। सोशियल मीडिया के कचरे से बचें।


नार्थम्पटन विश्वविद्यालय के फैकल्टी आॅफ आर्ट, साइंस एंड टेक्नोलाॅजी कीे डिप्टी डीन प्रो केट विलियम्स ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि सोशियल मीडिया के बढ़त के कारण आज हर व्यक्ति एक पत्रकार है लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है इसलिए कोई भी जानकारी साझा करने से पूर्व उसे जांच ले। प्रो विलियम्स ने कहा कि पत्रकारिता व्यवसाय नही है यह अपने दर्शकों तक सही सूचना पहंुचाने का कार्य है और लोग सही अपेक्षा करते है कि पत्रकार सही सूचना प्रदान करता है इसलिए हर स्टोरी को पब्लिश करने से पूर्व तथ्यों को जांच लें।


एमिटी स्कूल आॅफ फिल्म एंड ड्रामा की चेयरपरसन श्रीमती पूजा चैाहान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एमिटी विश्वविद्यालय का उददेश्य छात्रों को विभिन्न क्षेत्रो मे भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करना है। इस सम्मेलन के माध्यम मे ंहम अकादमिक एंव मीडिया क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों को एक मंच पर लाकर छात्रों के संपूर्ण विकास हेतु मार्गदर्शन करना है। श्रीमती चैाहान ने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से छात्रों को वर्तमान समय मीडिया के कार्यो को सीखने एंव समझने का अवसर प्राप्त होगा इसके अतिरिक्त वर्तमान उद्योगों की अपेक्षाओं की जानकारी प्राप्त होगी और उसी के अनुरूप छात्रों को तैयार किया जायेगा।


इस अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन के अंर्तगत यूके, यूएसए, लुथानिया, इरान, मलेशिया आदि से अंर्तराष्ट्रीय प्रतिभागीया आई है।  दो दिन में लगभग 75 डेलिगेट ने कार्यक्रम में शिरकत करेंगें। 07 तकनीकी सत्रो ंमे कुल 65 पेपर प्रस्तुत किये जायेगें।


                इस अंर्तराष्ट्रीय सम्मेलन के अंर्तगत तकनीकी सत्र में डिजिटल कल्चर विषय पर भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता शाजिया इल्मी, बीबीसी इंडिया के डिजिटल एडिटर श्री मिलिंद खांडेकर, एनएबी डिजिटल मीडिया के सह सस्थापक श्री आकाश बैनर्जी, न्यूज24 चैनल के श्री सतीश सिंह, आब्र्जवनाउ की एडिटर इन चीफ सुश्री तान्या टिक्कू ने अपने विचार रखे। जिसमें भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने कहा कि डिजिटल मीडिया ने विभिन्न आवाजों को अपनी बात रखने का मंच प्रदान किया और लोगों को अवसर प्रदान किया जो उन्हे पांरपरिक पत्रकारिता मेे प्राप्त नही था। उन्होनें छात्रों से कहा कि प्रचुर मात्रा में सूचना प्राप्त करने के अवसर मिल रहे है इसका लाभ उठाये।


                इस सम्मेलन मे एमिटी स्कूल आॅफ कम्यूनिकेशन के सलाहकार प्रो आर के डार्गन, एमिटी स्कूलऑफ कम्यूनिकेशन की संयुक्त निदेशिका डा पल्लवी मजूमदार एंव डा गौरी चक्रवर्ती भी उपस्थित थी।