जनहित किसान पार्टी के नेताओं ने जंतर-मंतर पर भरी हुंकार, की भागीदारी की मांग

जनहित किसान पार्टी ने दिल्ली के जंतर- मंतर पर भरी हुंकार, सौपें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के नाम ज्ञापन
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नई दिल्ली। जनहित किसान पार्टी ने आज रविवार 5 जनवरी को दिल्ली के जंतर मंतर पर इंसान और इंसानियत पर आधारित भागीदारी हेतु जबर्दस्त धरना -प्रदर्शन किया। इस मौके पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व गृहमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।



 इस मौके पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौरसिया श्याम सुंदर दास ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी दिल्ली के सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। साथ ही पान को कृषि का दर्जा देने की मांग को जोरदार ढंग से उठाया। इसके अलावे उन्होंने देश में पंचायत चुनाव की भांति विधान सभा, लोकसभा चुनाव में भी पिछड़ी जाति, अतिपिछड़ा जातियों को आरक्षण देने की मांग उठाई। इसके अतिरिक्त अन्य राज्यों की तरह दिल्ली और उत्तरप्रदेश में गुटका को तत्काल बंद करने की मांग कर डाली।


उन्होंने जंतर मंतर पर एक बड़ी भीष्म प्रतिज्ञा की कि जो लोग सोचते हैं कि वे चुनाव लड़ने के लिए पार्टी बनाई हैं, वे भ्रम में हैं। आज यहां प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं आजीवन चुनाव नहीं लडूंगा। मैं चुनाव लड़वाऊंगा और चुनाव  जितवाऊंगा।



उन्होंने कहा कि आज देश का अन्नदाता किसान कंगाल, फटेहाल स्थिति में है। उसके अन्न के वाजिब मूल्य नहीं मिल रहे हैं। जबकि भारत के विधायक और सांसद अपनी जेबें भरने में लगे हैं। देश के हर व्यक्ति के आमदनी का ग्राफ नीचे गिरता जा रहा है। बड़ी - बड़ी कंपनियां दिवाला हो रही है।देश में रोजगार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह देश में कबतक चलेगा?


उन्होंने भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा आदि पार्टियों पर आरोप लगाया कि उनके नेता जातीय राजनीति करने में लगे हैं। देश में 7 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जिनके पास कृषि की कोई भूमि नहीं है। तो कुछ लोग ऐसे हैं जिनके पास सौ से 300 एकड़ तक जमीन है।


चौरसिया श्याम सुंदर दास ने बताया कि वे 18 साल भाजपा के लिए कार्य किया है और उनका 5-5 बार टिकट काटा गया। वे जातीय राजनीति के शिकार हुए तो उन्होंने जनहित किसान पार्टी बना ली है। चौरसिया जाति की पूरे देश में एक भी सांसद नहीं हैं। यूपी में एक भी विधायक नहीं हैं। वे पिछड़ों को राजनीति में भागीदारी देकर समाज को जोड़ेंगे।जब समाज जाग जाएगा तब राजनीतिक चक्र खुद बदल जाएगी। वैसे, चौरसिया समाज जागृत है। बस समाज को जोड़ने की जरूरत है।


उन्होंने कहा कि किसी समाज में जब  राजनीतिक जागृति बन जाती है तो सामाजिक संगठन खुद ब खुद समाप्त हो जाते हैं। यह स्थिति चौरसिया समाज के संगठनों के साथ भी होगा। उन्होंने पान विकास निगम का गठन राष्ट्रीय व प्रादेशिक स्तर पर किये जाने की मांग भी की। साथ ही प्राईवेट स्कूल और प्राईवेट अस्पताल की मनमानी, पटरी दुकानदारों को पक्की दुकानों की व्यस्था करने ,बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, जमींदारों की 12.50 एकड़ से अधिक भूमि को भूमिहीनों में बांटने, बंधुआ मजदूर रखनेवालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने, ठेकेदारी प्रथा बंद करने आदि मांगों को उठाया। उन्होंने चौधरी चरण सिंह को असली किसानों का नेता तथा शिवदयाल सिंह चौरसिया को पिछड़ों का मसीहा करार दिया।


इस मौके पर घनश्याम चौरसिया, दीपक चौरसिया, उमाशंकर यादव , कमलेश चौरसिया, सुरेश चौरसिया, अनिल चौरसिया, वीरेंद्र चौरसिया, मुन्नालाल चौधरी, पवन चौरसिया, नसीम अख्तर, अमर नाथ चौरसिया, विवेक चौधरी, सुनील चौरसिया, अजित कुमार यादव आदि मौजूद रहे।