वेश्यावृत्ति और रेडलाइट इलाकों के खिलाफ पहली वोमेन कॉन्फ्रेंस 2020 का आयोजन

नोएडा। आज महिला प्रशिक्षण संस्थान द्वारा नेशनल गर्ल चाइल्ड डे के अवसर पर वूमेन कांफ्रेंस 2020 कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें "वेश्यावृत्ति और रेड लाइट इलाकों के खिलाफ पहली "Women Conference 2020" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें महिलाओ ने इन विषयो पर अपने विचार को प्रस्तुत किया।



महिला प्रशिक्षण संस्थान की संस्थापक शैली सेठी जी ने बताया की हमारे देश में बेटियों ,महिलाओ की स्थिति बहुत ही दुखद एवं बुरी हैं । रोज बलात्कार एवं शोषण की खबरों से ह्रदय बहुत पीड़ा महसूस करता है । ऐसे में हमारे एवं अन्य देशो में आदिकाल से चले आ रहे "वेश्यावृत्ति और रेड लाइट इलाकों " के विरुद्ध ना कोई बात करना चाहता हैं ना ही इन मुद्दों पर सख्ती से कोई कार्य एवं कार्यवाही करना चाहता है, जिससे ये कुरीति लगातार समाज में फैलती जा रही है। अब कोई घर इन पीड़ाओं से दूर नहीं दिखता ।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर्स एम.के.चंद्रा रहे। महिला प्रशिक्षण संस्थान द्वारा एम.के.चंद्रा को सम्मानित किया गया एवं उन्होंने सभी वक्ताओ को प्रमाण पत्र एवं ट्रॉफ़ी देकर पुरुस्कृत किया । 
शैली सेठी जी ने बताया की एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में यौनकर्मियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही हैं। 1997 में यौनकर्मियों की संख्या 20 लाख थी जो 2003-04 तक बढ़कर 30 लाख हो गई। 2006 में महिला और बाल विकास विभाग द्वारा तैयार रिपोर्ट में यह भी पाया गया था कि देश में 90 फीसदी यौनकर्मियों की उम्र 15 से 35 साल के बीच है।
ऐसे भी मामले देखने में आए हैं जिसमें झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तरांचल में 12 से 15 वर्ष की कम उम्र की लड़कियों को भी वेश्यावृत्ति में धकेल दिया जाता है। देश में रोजाना 2000 लाख रूपये का देह व्यापार होता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के एक अध्ययन के मुताबिक भारत में 68 प्रतिशत लड़कियों को रोजगार के झांसे में फंसाकर वेश्यालयों तक पहुंचाया जाता है। 17 प्रतिशत शादी के वायदे में फंसकर आती हैं। वेश्यावृत्ति में लगी लड़कियों और महिलाओं की तादाद 30 लाख है। मुम्बई और ठाणे के वेश्यावृत्ति के अड्डों से तो खण्डित रूस और मध्य एशियाई देशों की युवतियों को पकड़ा गया है। भारत में वेश्यावृत्ति के बाजार को देखते हुए अनेक देशों की युवतियां वेश्यावृत्ति के जरिए कमाई करने के लिए भारत की ओर रूख कर रही हैं।
भारतवर्ष में वैवाहिक संबंध के बाहर यौनसंबंध अच्छा नहीं समझा जाता है। वेश्यावृत्ति भी इसके अंतर्गत है। लेकिन दो वयस्कों के यौनसंबंध को, यदि वह जनशिष्टाचार के विपरीत न हो, कानून व्यक्तिगत मानता है, जो दंडनीय नहीं है। "भारतीय दंडविधान" 1860 से "वेश्यावृत्ति उन्मूलन विधेयक" 1956 तक सभी कानून सामान्यतया वेश्यालयों के कार्यव्यापार को संयत एवं नियंत्रित रखने तक ही प्रभावी रहे हैं। वेश्यावृत्ति का उन्मूलन सरल नहीं है, पर ऐसे सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए जिससे इस व्यवसाय को प्रोत्साहन न मिले, समाज की नैतिकता का ह्रास न हो और जनस्वास्थ्य पर रतिज रोगों का दुष्प्रभाव न पड़े। कानून स्त्रीव्यापार में संलग्न अपराधियों को कठोरतम दंड देने में सक्षम हो। यह समस्या समाज की है।  
वूमेन कांफ्रेंस में मुख्य रूप से डा.रिच्चा बधोरिया , अधिवक्ता वंदना सिंह,रचना जोशी ,प्रीती जैन ,डा.नीलम शर्मा ,हेमलता शिशोदिया ,दिव्या,काजल , निशा , रूचि , ज्योती  शर्मा , श्वेता त्यागी , सुमन गोयल , रेनू सिंह ,सीमा कुशवाहा, अधिवक्ता , रोमी माथुर ,नमिता भल्ला , डा निखिता नागर ,शिवांगी शर्मा , पूनम शर्मा , भारती शर्मा , यास्मीन,रिता  सिंह  गौर आदि  मौजूद रहे  ।
तथा कार्येक्रम में सबसे उत्तम वक्ता के रूप में प्रथम नमिता भल्ला तथा दुसरा स्थान  रोमी  माथुर  जी विजेता रही । सभी देशवासियों को  नेशनल गर्ल चाइल्ड डे की हार्दिक बधाई |