यूपी में थ्री नॉट थ्री (303) आज गणतंत्र दिवस पर आख़िरी शान बनकर होगा विदा

लखनऊ। दशकों से पुलिस का साथ देने वाली .303 (थ्री नॉट थ्री) बोर राइफल अब इतिहास बन जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस गणतंत्र दिवस के मौके पर इस राइफल का आखिरी बार इस्तेमाल करेगी। इसके बाद थ्री नॉट थ्री को आधुनिक राइफल से रिप्लेस कर दिया जाएगा। इसकी जगह इंसास (इंडियन स्मॉल आर्म सिस्टम) और एसएलआर (सेल्फ लोडिंग राइफल) का उपयोग चलन में लाया जाएगा।



अपर पुलिस महानिदेशक (लॉजिस्टिक्स) विजय कुमार ने राइफल का विदाई आदेश जारी किया। उन्होंने सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को निर्देशित किया कि .303 बोर राइफल को इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में आखिरी सलामी दी जाएगी। यूपी पुलिस इसे आखिरी बार गणतंत्र दिवस पर इस्तेमाल करेगी। इसके बाद थ्री नॉट थ्री राइफल की जगह आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल चलन में आएगा।


जारी आदेश में 28 नवंबर, 2019 के उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें यूपी पुलिस महकमे में थ्री नॉट थ्री को चलन से बाहर करके इंसास राइफलों के इस्तेमाल का जिक्र था। इसी खास आदेश में सभी जिला पुलिस प्रमुख को कहा गया है कि इस बार की गणतंत्र दिवस परेड की सलामी इन्हीं थ्री नॉट थ्री राइफल से दी जाए। महकमे से बाहर हो रहीं थ्री नॉट थ्री को इससे बड़ी और सम्मानित विदाई या अंतिम सलामी का इससे बेहतर कोई दूसरा रास्ता शायद जमाने में न मिल पाता।


डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि .303 राइफल को यूपी पुलिस ने इस गणतंत्र दिवस शानदार विदाई देने का निर्णय किया है। गणतंत्र दिवस परेड में पुलिसकर्मी .303 बोर राइफल का प्रयोग करने के साथ ही इस हथियार के प्रयोग को बंद करने की घोषणा करेंगे। दशकों से पुलिस की साथी रही .303 बोर राइफल को मामूली विदाई नहीं मिलेगी। इसका प्रयोग बंद करने से पहले सभी एसएसपी/एसपी राइफल की खूबियों के बारे में बताएंगे।


हर बुरे वक्त में साथ देने वाली इस राइफल को यूपी पुलिस 75 वर्षों के सफर के बाद आखिरी अलविदा कहेगी। दरअसल, बढ़ते अपराध को देखते हुए यूपी सरकार ने यह फैसला लिया है। कानून व्यवस्था को मजबूत करने और लोगों को अधिक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी पुलिस को आधुनिक राइफलों से लैस करने का निर्णय लिया।


थ्री नॉट थ्री राइफल को सबसे पहले 1914 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल में लाया गया था। 1945 में पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस को यह राइफल चलाने की कमान सौंपी गई थी। मगर 1955 में ही 58 हजार से अधिक .303 बोर की राइफल हो जाने के कारण, इन्हें अप्रचलित घोषित कर दिया गया था। इसके बाद भी पुलिसकर्मी इन राइफलों का इस्तेमाल करते थे।