देव सूर्यमंदिर में तीनों स्वरूप में विराजते हैं भगवान सूर्य

देव में तीन स्वरूपों में विराजते हैं भगवान सूर्य
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देव में छठ करने का अलग महत्व है। यहां भगवान सूर्य तीन स्वरूपों में विराजमान है। देव सूर्यमंदिर में सात रथों से सूर्य की उत्कीर्ण प्रस्तर मूर्तियां अपने तीनों रूपों उदयाचल (प्रात:) सूर्य, मध्याचल (दोपहर) सूर्य, और अस्ताचल (अस्त) सूर्य के रूप में विद्यमान है। पूरे देश में यही एकमात्र सूर्य मंदिर है जो पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिमाभिमुख है।
 मंदिर के गर्भ गृह में भगवान सूर्य, ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश के रूप में विराजमान हैं। मंदिर में स्थापित प्रतिमा काफी प्राचीन है। मंदिर का सर्वाधिक आकर्षक भाग गर्भगृह के ऊपर बना गुंबद है जिसपर चढ़ पाना असंभव है। गर्भगृह के मुख्य द्वार पर बायीं ओर भगवान सूर्य की प्रतिमा है और दायीं ओर भगवान शंकर की गोद में बैठी प्रतिमा है। ऐसी प्रतिमा सूर्य के अन्य मंदिरों में देखने को नहीं मिलती। गर्भ गृह में रथ पर बैठे भगवान सूर्य की भी एक अदभुत प्रतिमा है। मंदिर में दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।


छठ के अवसर पर देव सूर्य मंदिर परिसर व सूर्यकुंड तालाब पर विशाल मेला लगता है। यहां 5-10 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां छठ पूजा करने पहुंचे हैं। देव सूर्य मंदिर अपनी शिल्पकला एवं मनोरमा छटा के लिए प्रख्यात है। यहां के सूर्यकुंड तालाब का विशेष महत्व है। छठ मेले के समय देव का कस्बा लघु कुंभ बन जाता है। छठ गीत से देव गुंजायमान हो उठता है।


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