गोधरा कांड में मारे गए चौरसिया परिवार को रेलवे ने अबतक नहीं दिया मुआवजा

गोधरा कांड में मारे गए चौरसिया परिवार को रेलवे ने अबतक नहीं दिया मुआवजा
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अहमदाबाद . गोधरा रेल अग्निकांड को 18 साल बीत चुके हैं और इस घटना में अपना तीन साल का पुत्र गंवाने वाले चौरसिया परिवार को आज तक सरकार और रेल विभाग की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया. पीडित परिवार कहना है कि रेल अग्निकांड का शिकार बच्चा यदि आज जिंदा होता 22 साल का होता. उल्लेखनीय है कि गोधरा रेलवे स्टेशन पर 27 फरवरी, 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच को आग लगा दी गई थी. इस अग्निकांड में 59 लोगों की जान गई थी. इनमें सात लोगों की अब तक शिनाख्त नहीं हो पाई है.


गुजरात हाईकोर्ट ने फरवरी 2019 में गोधरा रेल अग्निकांड के 52 पीड़ित परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा के तौर पर देने का आदेश दिया था. जिसमें पांच लाख रुपए राज्य सरकार और पांच लाख रुपए रेल विभाग को देना था. जानकारी के मुताबिक 52 में से 40 पीड़ित परिवारों का मुआवजा मिल चुका है. जबकि 12 पीड़ित परिवार को अब तक मुआवजा नहीं मिला है. जिसमें अहमदाबाद का एक चौरसिया परिवार भी शामिल है. इलाहाबाद के मूल निवासी ललनप्रसाद चौरसिया अपनी पत्नी, पुत्र अरविंद चौरसिया और तीन साल के पौत्र ऋषभ के साथ साबरमती एक्सप्रेस में कानपुर से अहमदाबाद आ रहे थे. 27 फरवरी 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन के निकट दंगाइयों ने साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी थी.


इस अग्निकांड में 59 लोगों की जलकर मौत हो गई थी. जिसमें अरविंद चौरसिया का 3 साल का बेटा भी शामिल था. इस घटना में ललनप्रसाद चौरसिया भी आग में 80 फीसदी झुलस गए थे. चौरसिया की पत्नी और पुत्र अरविंद भी घायल हुए थे. घटना के बाद राज्य सरकार और रेल विभाग ने मृतकों के परिजनों को रु. 5-5 लाख और घायलों को रु. 50-50 हजार की सहायता देने का ऐलान किया था. घटना के 17 साल गुजरात हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों को 5-5 लाख सहायता देने की शुरुआत की.


लेकिन 18 साल बाद अरविंद चौरसिया को आज राज्य सरकार और रेलवे की ओर से मुआवजा राशि नहीं मिली. अरविंद चौरसिया ने बताया कि अग्निकांड में उनका तीन साल बच्चा पूरी तरह से जल गया था, जिसका शव भी नहीं मिला. चौरसिया ने बताया कि काफी समय से डेथ सर्टिफिकेट नहीं होने की वजह से उन्हें मुआवजा राशि नहीं दी जा रही थी. हांलाकि अब अरविंद चौरसिया का कहना है कि रेलवे की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र को मान्य रखते हुए मुआवजा देने को सरकार तैयार हो गई है. अरविंद चौरसिया ने बताया कि उनके पिता और माता समेत वह आग में घायल हो गए थे. घटना के बाद घायलों के लिए की गई घोषणा के मुताबिक उन्हें 50-50 हजार की सहायता राशि भी उस वक्त उन्हें नहीं दी गई थी.