वर-वधु वरमाला को मज़ाक न बनने दें

नोएडा। आजकल शादियों में ये बात काफी नजर आ रही है कि शादी के समय स्टेज पर वरमाला के वक्त वर या दूल्हा बड़ा तनकर खड़ा हो जाता है, जिससे दुल्हन को वरमाला डालने में काफी कठिनाई होती  है। कभी कभी वर पक्ष के लोग दूल्हे को गोद में उठा लेते हैं, और फिर वधु पक्ष के लोग भी वधु को गोद में उठाकर जैसे -तैसे वरमाला कार्यक्रम सम्पन्न करवा पाते हैं, आखिर ऐसा क्यों...? क्या करना चाहते हैं हम...?



हम एक पवित्र संबंध जोड़ रहे हैं या इस नये संबंध को मजाक बना रहे हैं और अपनी जीवनसँगनी को हजार-पांच सौ लोगो के बीच हम उपहास का पात्र बनाकर रह जाते हैं। कोई प्रतिस्पर्धा  नहीं हो रही है, दंगल या अखाड़े का मैदान नहीं है, पवित्र मंडप है। पवित्रअग्नि का आवाहन होता है भगवान् श्रीराम ने सम्मान सहित कितनी सहजता से सिर झुकाकर सीता जी से वरमाला पहनी थी...?


यही हमारी परंपरा है। विवाह एक पवित्र बंधन है। संस्कार है।कृपया इसको मजाक ना बनने दे...।


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