कोविड 19 पर गरीबों के बीच राहत और सरकारी सहायता का आंकड़ा

नई दिल्ली। कोविड 19 पर सरकार गरीबों के लिए बड़ा कदम उठाया है। गरीबों तक राहत पहुंचाने के लिए बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है। महज सब गरीबों तक सहयोग पहुंचने की बात पर प्रश्न चिन्ह भी लग रहे हैं। अभी भी देश के कई  हिस्सों से आवाज उठ रही है कि उन्हें राहत सामग्री नहीं मिल रही है। दरअसल, राहत तो उन्हें ही मिली है,  जिनका नाम सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है। उन्हें तो यह सहयोग प्रतिमाह राशन या अन्य सुविधाओं में मिल ही जाता है।



पर, जिनका नाम उन दस्तावेज में नहीं है, वे महरूम ही हैं। शहरों में तो यह विडंबना है कि लाखों करोड़ों लोगों को जो देश के विभिन्न भागों से काम करने के लिए आते हैं, उन्हें यह सुविधा नहीं मिल पा रही है क्योंकि शहरों के मकान मालिक किसी भी तरीके से राशन कार्ड बनने नहीं देते हैं, नहीं अन्य सुविधाओं के लिए कोई रिकॉर्ड ही देते हैं। बाहरी कामगार के पास यहां का दस्तावेज नहीं होता जिससे वह सरकारी सुविधाएं प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। जबकि शहरों में देखा गया है कि बड़े-बड़े सक्षम लोग भी सरकारी सुविधा प्राप्त करने के लिए राशन कार्ड जैसे कार्ड धारक बन गए हैं और वे लाभ उठा रहे हैं, लेकिन जो आवश्यक जरूरतमंद और गरीब लोग हैं, वह इस सुविधा से वंचित रह जाते हैं। जबकि कोरोनावायरस में यही बाहर के कामगार परेशान हैं क्योंकि यह सुविधा उन्हें नहीं मिल पा रहा है और यह सुविधा उन्हें ही मिल पा रहा है जो दस्तावेज बनाकर किसी न किसी प्रकार से सरकारी सुविधा का लाभ प्राप्त करते जा रहे हैं।  जो उस दस्तावेजों के माध्यम से सहायता राशि प्राप्त कर रहे हैं उनके लिए बड़ी बात नहीं है, पर उन लाखों लोगों को जिनके पास कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं है, ऐसे शहरों में कामगारों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है कि अभी सरकार या समाज सेवी संस्थानों द्वारा उन्हें अल्प मात्रा में जो भोजन दिए जा रहे हैं उससे उनका भविष्य  थोड़ी राहत देने वाली जरूर है, पर, उनके जीवन में अंधकार ही अंधकार दिखाई दे रहा है।


बहरहाल, सरकार द्वारा किसको और कितना लाभ मिल पाया है,  वह देने वाले और लेने वाले ही जान सकते हैं। पर सरकारी रिकॉर्ड तो यह कह रहा है :-



  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 32 करोड़ से अधिक गरीबों को 29,352 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली

  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्‍न योजना के तहत 5.29 करोड़ लाभार्थियों को खाद्यान्न का मुफ्त राशन वितरित किया गया

  • 97.8 लाख मुफ्त उज्ज्वला सिलेंडर वितरित किए गए

  • ईपीएफओ के 2.1 लाख सदस्यों ने ईपीएफओ खाते से गैर-वापसी योग्य अग्रिम की ऑनलाइन निकासी का लाभ लिया, कुल राशि 510 करोड़ रुपये है

  • पीएम-किसान की पहली किस्त: 14,946 करोड़ रुपये कुल 7.47 करोड़ किसानों को हस्तांतरित किए गए 

  • 9930 करोड़ रुपये कुल 19.86 करोड़ महिला जन धन खाता धारकों को दिए गए

  • 1400 करोड़ रुपये लगभग 2.82 करोड़ वृद्धों, विधवाओं और दिव्‍यांगजनों को दिए गए

  • 2.17 करोड़ भवन और निर्माण श्रमिकों को 3071 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिली


समाज के कमजोर वर्गों को बुनियादी सुविधाएं निरंतर मिलती रहें और कोविड-19 के कारण किए गए लॉकडाउन की पूरी अवधि के दौरान वे प्रभावित न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 26 मार्च 2020 को 1.70 लाख करोड़ रुपये के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) की घोषणा की, ताकि इस तरह के लोगों को लॉकडाउन के प्रतिकूल प्रभावों से बचाया जा सके।


प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के एक हिस्से के रूप में सरकार ने महिलाओं और गरीब वरिष्ठ नागरिकों एवं किसानों को मुफ्त में अनाज देने और नकद भुगतान करने की घोषणा की। इस पैकेज के त्‍वरित कार्यान्वयन पर केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। वित्त मंत्रालय, संबंधित मंत्रालय, मंत्रिमंडलीय सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) यह सुनिश्चित करने में कोई भी कसर नहीं छोड़ रहे हैं कि राहत के उपाय तेजी से और लॉकडाउन से उत्‍पन्‍न स्थिति के मद्देनजर जरूरतमंदों तक अवश्‍य ही पहुंच जाएं।


फि‍नटेक और डिजिटल तकनीक का उपयोग लाभार्थियों को त्‍वरित और सही ढंग से हस्तांतरण करने के लिए किया जा रहा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, अर्थात हस्‍तांतरण का उपयोग किया जा रहा है जो यह सुनिश्चित करता है कि राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जमा हो जाए, धनराशि के कहीं और न जाने की गुंजाइश ही न रहे तथा इसकी प्रभावकारिता बेहतर हो जाए। इससे लाभार्थी के खाते में धनराशि को सीधे डालना भी सुनिश्चित हो गया है और इसके लिए लाभार्थी को बैंक शाखा जाने की आवश्यकता नहीं रहती है।


पैकेज के तहत 13 अप्रैल2020 तक 32.32 करोड़ लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे तौर पर 29,352 करोड़ रुपये की नकद सहायता दी गई है।


प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्‍न योजना:


अप्रैल के लिए निर्धारित 40 लाख मीट्रिक टन में से अब तक 20.11 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का उठाव 31 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जा चुका है। अप्रैल 2020 की पात्रता के रूप में 1.19 करोड़ राशन कार्डों द्वारा कवर किए गए 5.29 करोड़ लाभार्थियों को 2.65 लाख मीट्रिक टन अनाज 16 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वितरित किए गए हैं। 3985 मीट्रिक टन दलहन भी विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी गई है।


 


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मुफ्त में गैस सिलेंडर:-


इस पीएमयूवाई योजना के तहत अब तक कुल 1.39 करोड़ सिलेंडर बुक किए जा चुके हैं और 97.8 लाख पीएमयूवाई मुफ्त सिलेंडर पहले ही लाभार्थियों को वितरित किए जा चुके हैं।


बकाया राशि का 75% गैर-वापसी योग्‍य अग्रिम या 3 माह का वेतनइनमें से जो भी कम होलेने की अनुमति ईपीएफओ के सदस्यों को है:  


ईपीएफओ के 2.1 लाख सदस्यों ने अब तक 510 करोड़ रुपये की ऑनलाइन निकासी की है।  .


माह के लिए ईपीएफ अंशदान - 100 कामगारों तक के प्रतिष्ठानों में प्रति माह 15000 रुपये से कम वेतन प्राप्त करने वाले ईपीएफओ सदस्यों के योगदान के रूप में वेतन के 24% का भुगतान।


 


अप्रैल, 2020 हेतु इस योजना के लिए ईपीएफओ को 1000 करोड़ रुपये की राशि पहले ही जारी की जा चुकी है। 78.74 लाख लाभार्थियों और संबंधित प्रतिष्ठानों को सूचित कर दिया गया है। घोषणा को लागू करने के लिए एक योजना को अंतिम रूप दे दिया गया। प्राय: पूछे जाने वाले प्रश्न वेबसाइट पर उपलब्‍ध हैं।


 


मनरेगा:-


बढ़ी हुई मजदूरी दर को अधिसूचित कर दिया गया है जो 01 अप्रैल 2020 से प्रभावी है। चालू वित्त वर्ष में  19.56 लाख कार्य-दिवस सृजित हुए। इसके अलावा, मजदूरी और सामग्री दोनों के लंबित बकाये को समाप्त करने के लिए राज्यों को 7100 करोड़ रुपये जारी किए गए।  


सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए बीमा योजना:


योजना का संचालन न्यू इंडिया एश्योरेंस द्वारा किया गया है जिसमें 22.12 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों को कवर किया गया है


प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज


13/04/2020 तक कुल प्रत्यक्ष लाभ हस्‍तांतरण


 










































योजना



लाभार्थियों की संख्‍या



अनुमानित धनराशि



पीएमजेडीवाई महिला खाताधारकों को सहायता



19.86 करोड़ (97%)



9930 करोड़ रुपये



एनएसएपी लाभार्थियों (वृद्ध विधवादिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक) को सहायता



2.82 करोड़ (100%)



1405 करोड़ रुपये



 पीएम-किसान के तहत  किसानों के खातों में डाली गई धनराशि



7.47 करोड़ ( 8 करोड़ में से)



14,946 करोड़ रुपये



भवन और अन्य निर्माण श्रमिकों को सहायता



2.17 करोड़



3071 करोड़ रुपये



कुल



32.32 करोड़



29,352 करोड़ रुपये