बिहार में लॉकडाउन के तीसरे फेज पर एडवाईजरी और बिहार लौट रहे लोगों की दर्द- कथा


पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपर मुख्य सचिव गृह सह सामान्य प्रशासन, प्रधान सचिव स्वास्थ्य, प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर किये जा रहे कार्यों, लॉकडाउन के तीसरे फेज के लिए राज्य सरकार द्वारा गाइडलाइन्स जारी हुआ। जिसमें बाहर से आये प्रवासी श्रमिकों एवं छात्र छात्राओं के लिए की जा रही व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई है।


बिहार सरकार ने प्रवासी बिहार में आनेवाले लोगों के प्रति दरियादिली जरूर दिखाई है। उन्हें सहायता के रूप में यात्रा खर्च के साथ 500 और अधिक 1000 रुपये देने की भी घोषणा की है। जिस तरह से लॉकडाउन और कोरोना महामारी के कारण बिहार प्रदेश के दूसरे  प्रदेशों में रहने वाले लोग अपने राज्य में वापस लौटने की उत्सुकता जगा रहे हैं, वह आगे के दिनों में बिहार के लिए काफी मुसीबत भी बन सकता है, क्योंकि बिहार में आजादी के बाद कोई बड़ी अदद क्रांति नहीं हुई। बिहार में हमेशा नेताओं द्वारा लूट- खरोट की गई है। विकास के सिर्फ सपने बोए गए हैं और यहां के लोगों को भ्रम में रखा गया है। ऐसा बड़ा काम नहीं किया गया जो  बिहार बड़े औद्योगिक रूप में उभर सके या रोजगार का साधन उपलब्ध करा सके। 


बिहार संसाधनों की दृष्टि से काफी समृद्ध था, लेकिन उसका दूसरे राज्यों द्वारा जमकर दोहन किया गया और बिहार की संपन्नता दूसरे जगह केंद्रित हुई और बिहार में लोग बड़े पैमाने पर श्रमिक ही बनकर रह गए, जो दूसरे राज्यों में कामगार बनकर काम करने के लिए चले जाते हैं। एक बार फिर देशव्यापी लॉक डाउन की विषमता के कारण वे अपने प्रदेश में लौट रहे हैं। आगे बिहार सरकार की क्या रणनीति होगी वह तो भविष्य के गर्भ की बात है।


पर, बिहारी श्रमिकों, बिहारी बुद्धिजीवियों का जो बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है और दूसरे राज्यों की प्रगति, तरक्की में उनका खून पसीना लगा हुआ है, क्या बिहार में एक बार पुनः ऐसा माहौल बनेगा जो बिहार के लोग दूसरे राज्यों में पलायन न कर सके और बिहार में ही उन्हें रोजगार और कारोबार करने की एक अच्छा वातावरण, एक अच्छा माहौल मिलेगा ?