सरकार आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार करे : राहुल गांधी


नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज कोरोना लॉकडाउन पर अपनी बात को जिस तरीके से, जिस ढंग से रखा वह उनको पप्पू कहने वालों पर जबरदस्त तमाचे के समान है, क्योंकि इस मौके पर उन्होंने जो गंभीरता पूर्वक बातें कही है, वही आम जनता भी कह रही है। यहां तक कि बुद्धिजीवी भी लॉकडाउन पर सरकार के द्वारा किए गए तमाम घोषणाओं पर सवाल उठा रहे हैं। तो राहुल गांधी ने भी सवाल उठाया है और ऐसे सवाल उठाया है जिस पर सरकार को सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा।


सरकार अपनी बातों को ही आगे ले जाने पर अडिग है और जनमानस के भावनाओं का ख्याल नहीं कर रही है। लॉकडाउन में लाखों श्रमिक देश के विभिन्न भागों से अपने घर की ओर पलायन कर रहे हैं और सरकार के दावे ऐसे कि जैसे सब को राहत पहुंच रही है। जबकि श्रमिकों का कहना है कि सरकार की तरफ से उन्हें अब तक कोई राहत सामग्री नहीं पहुंचाई गई है। उनकी बात भी सच है क्योंकि सरकार जो राहत दे रही है, वह आंकड़ों के माध्यम से दे रही है और आंकड़ों की बाजीगरी ऐसी है कि जो वास्तविक जरूरतमंद हैं, उन्हें वह राहत नहीं पहुंच पा रही है। 


जो आंकड़ों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है उसमें बहुत से ऐसे भी लोग शामिल हैं, जो पात्र नहीं हैं और वे भी उसका फायदा उठा रहे हैं। ऐसे में उन जरूरतमंदों को सहयोग की जरूरत थी, लेकिन सरकार की उदासीनता और आंकड़ोंबाजी के कारण वे श्रमिक मजबूर होकर अपने वतन की ओर लौट रहे हैं, जा रहे हैं।


कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार से आग्रह किया कि वह आर्थिक पैकेज पर पुनर्विचार करें और लोगों के खाताों में सीधे पैसे डालें क्योंकि इस वक्त उन्हें कर्ज की नहीं, बल्कि सीधी आर्थिक मदद की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को लॉकडाउन को समझदारी और सावधानी के साथ खोलने की जरूरत है और बुजुर्गों व गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।


गांधी ने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ''जो पैकेज होना चाहिए था वो कर्ज का पैकेज नहीं होना चाहिए था। इसको लेकर मेरी निराशा है। आज किसानों, मजदूरों और गरीबों के खाते में सीधे पैसे डालने की जरूरत है।'' उन्होंने कहा, ''आप (सरकार) कर्ज दीजिए, लेकिन भारत माता को अपने बच्चों के साथ साहूकार का काम नहीं करना चाहिए, सीधे उनकी जेब में पैसे देना चाहिए। इस वक्त गरीबों, किसानों और मजदूरों को कर्ज की जरूरत नहीं, पैसे की जरूरत है।'


कांग्रेस नेता ने कहा, ''मैं विनती करता हूं कि नरेंद्र मोदी जी को पैकेज पर पुनर्विचार करना चाहिए. किसानों और मजदूरों को सीधे पैसे देने के बारे में सोचिए.'' उन्होंने कहा, ''मैंने सुना है कि पैसे नहीं देने का कारण रेटिंग है। कहा जा रहा है कि वित्तीय घाटा बढ़ जाएगा तो बाहर की एजेंसियां हमारे देश की रेटिंग कम कर देंगी. हमारी रेटिंग मजदूर, किसान, छोटे कारोबारी बनाते हैं। इसलिए रेटिंग के बारे में मत सोचिए, उन्हें पैसा दीजिए।'' राहुल गांधी के मुताबिक लॉकडाउन खोलते समय समझदारी और सावधानी की जरूरत है, हमें इसे ध्यान से हटाना है। हमारे बुजुर्गों, हृदय, फेफड़े और किडनी के रोग से ग्रसित लोगों की रक्षा करनी चाहिए।