सुरेश चौरसिया : एक व्यक्तित्व गाथा


सुरेश चौरसिया, पेशे से पत्रकार हैं। 1985 ई. में  हाई स्कूल बोर्ड पास करने के बाद वे लेखन कार्य की ओर एक कदम आगे बढ़ाया। इस दौरान उनकी पढ़ाई भी जारी रही। 


वे मूलतः बिहार के औरंगाबाद जिले के सुविख्यात सूर्यतीर्थ देव से 4 किमी. पूर्व-दक्षिण कोण पर स्थित केताकी पंचायत के तेजू विगहा गांव के निवासी हैं। उनका जन्म 18 जनवरी 1969 को हुआ। 



साधारण पान किसान के पुत्र सुरेश चौरसिया बचपन काल से ही कुशाग्र बुद्धि के साथ समाज सेवा के प्रति संवेदनशील रहे हैं। वे पढ़ाई- लिखाई के साथ पान की खेती में हाड़तोड़ मेहनत करने से घबराते नहीं थे। आर्थिक विषमताओं का सामना करते हुए वे आगे का लक्ष्य साधते रहे। धार्मिक कार्यों में कुछ ज्यादा अभिरुचि के कारण कई धार्मिक आयोजनों में भाग लेने लगे। इस दौरान वे मंच संचालन की भूमिका में भी देखे गए।


 


उनकी रचनाएं देश के प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में छपने लगी तो वे पत्रकारिता की ओर मुखर हुए। डाल्टेनगंज से प्रकाशित होनेवाले समाचार -पत्र राष्ट्रीय नवीन मेल के लिए देव से बतौर संवाददाता का कार्य करने लगे। देव से देव के लिए उनकी यह पहली और देव के लिए पहले पत्रकार के रूप में उनकी शुरुआत हुई थी। वह 1990 की बात है, जब उन्होंने देव की हर समस्याओं और मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया था। देव से अकेले पत्रकारिता पर उन्हें स्थानीय लोगों से भरपूर सम्मान मिला करता था।



 उन्होंने औरंगाबाद के सिन्हा कॉलेज संबद्ध मगध विश्वविद्यालय, बोधगया से एम.ए की डिग्री प्राप्त की।  वे 1997 में पत्रकारिता और लेखन को विस्तार देने के लिए दिल्ली आ गए। यहां दैनिक भारत आत्मा से जुड़े। फिर कुबेर टाईम्स व अन्य राष्ट्रीय अखबारों में काम किया। पर, उन्होंने अपने आत्म-स्वाभिमान को गिरने नहीं दिया। पत्रकारिता के द्वंद और अंदर की राजनीति से ऊबकर वे खुद समाचार-पत्र निकालने के लिए उद्धत हुए और 2000 में कांव - कांव भारत साप्ताहिक समाचार- पत्र को प्रकाशित व संपादकत्व शुरू किया। अखबार हिट रहा, लेकिन टाईटल पर लोगों की उंगलियां भी उठती रही। अंततः वे दूसरी टाईटल राष्ट्रीय शान साप्ताहिक के रूप में प्राप्त किया। फिर वे इसे दैनिक के आकार में बढ़ा दिया है। वे उसका विस्तार कर रहे हैं। तात्कालिक राष्ट्रीय शान पॉर्टल पर भी खबरें प्रकाशित होती है। 


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